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शुक्रवार, 23 अगस्त 2013

तनहा भी खुश रहता


ये भीड़ नहीं होती 
तो तनहा भी खुश रहता
ना कोई सवाल पूछता
ना किसी को
जवाब देना पड़ता
ना गम की बातें होती
ना कोई ज़ख्म कुरेदता
अश्कों को आँखों में
सज़ा कर रखता
दो बातें
खुद से ही कर लेता
मन को तसल्ली
दिल को सुकून दे देता
ये भीड़ नहीं होती 
तो तनहा भी खुश रहता
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
80-217-23-08-2013
तनहा,तन्हाई,ज़िन्दगी,सुकून,गम,शायरी  

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