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शनिवार, 3 अगस्त 2013

सच कहने के फितरत ने बहुत ज़ुल्म ढाए हम पर


सच कहने के फितरत ने
बहुत ज़ुल्म ढाए हम पर
हवाओं ने भी ढेरों
इलज़ाम लगाए हम पर
चाँद की ठंडक में भी
शोले बरसाए गए हम पर
दोस्त तो ने भी जी भर के
खंज़र चलाये हम पर
खुदा के रास्ते पर चलना
सितम ढा गया हम पर
सच कहना नहीं छोड़ेंगे
चाहे मौत भी आ जाए
दोस्त का भेष बदल कर
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
 07-146-3-08-2013

ज़िन्दगी,सच,फितरत,शायरी ,ज़ुल्म,selected,

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