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गुरुवार, 15 अगस्त 2013

सम्मान की दृष्टि

(जीवन अमृत )
साधारण
कुडता पयजामा
पहन कर
समारोह में चला गया
देखते ही
मित्र ने टोक दिया
निरंतर कुछ तो अपनी
प्रतिष्ठा का ख्याल करो
इतनी साधारण वेश भूषा
पहन कर क्यों आ गए
लोग तुम्हें सम्मान की
दृष्टि से देखते हैं
व्यवहार और कामों का
गुणगान करते हैं
समारोह में तो
बढ़िया वेश भूषा में
आना चाहिए
मित्र की बात सुन कर
मन व्यथित हो गया
नहीं चाहते हुए भी
कहना पडा
मित्र मन में इतनी
हीन भावना नहीं
रखनी चाहिए
वेशभूषा केवल साफ़
सुथरी होनी चाहिए
वेशभूषा से
किसी को कोई फर्क
नहीं पड़ना चाहिए
गुण,व्यवहार और
कर्मों को भूल कर
अगर वेशभूषा के
कारण ही कोई
सम्मान देता है
तो ऐसे सम्मान को
महत्वहीन
समझना चाहिए
कोई कुछ
कह भी दे तो
एक कान से सुन कर
दूसरे कान से
निकाल देना चाहिए 
57-194-15-08-2013
जीवन अमृत ,जीवन,कर्म,व्यवहार,वेश भूषा,सम्मान,गुण,
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

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