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शुक्रवार, 16 अगस्त 2013

ईमान का कटघरा

(जीवन दर्शन) )
पडोसी के घर पर लगे
अमरुद के पेड़ से
सड़क की ओर लटकते 
अमरुद को देखा तो 
मन लालच से भर गया 
स्वयं पर 
काबू ना रख पाया 
इधर उधर देखा 
कोई देख तो नहीं रहा 
झट से अमरुद तोड़ कर 
जेब में रख लिया
विजयी मुस्कान लिए 
आगे बढ़ गया 
कुछ समय बाद 
जब एक बालक को 
अमरुद तोड़ते देखा 
उसे चोरी करने से 
मना किया 
बालक मुस्काराया 
धीरे से बोला 
मुझे मना क्यों करते हो 
अपने भी तोड़ा था
मैंने चुपके से देखा था 
बालक की बात ने 
मुझे ईमान के कटघरे में 
खडा कर दिया
छोटे से लालच ने
मेरे सच को 
उजागर कर दिया 
खुद को अपनी ही 
नज़रों से गिरा दिया
आज समझ आ गया 
छुपा कर किया अपराध भी 
एक दिन बाहर आ ही जाता 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर  
61-198-16-08-2013

जीवन ,जीवन दर्शन,लालच,चोरी.बेईमानी ,ईमान



1 टिप्पणी:

  1. सुन्दर आत्मावलोकन!ईमानदारी की और एक और पायदान ऊपर।

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