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मंगलवार, 20 अगस्त 2013

शब्द भी वही वाक्य भी वही


शब्द भी वही वाक्य भी वही
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तुमने कहा गुलाब के
 फूल ने मुझे लुभाया
मैंने भी यही कहा
गुलाब के फूल ने 
मुझे लुभाया
तुम्हें उसकी सुन्दरता ने 
मुझे सुगंध ने लुभाया
शब्द भी वही वाक्य भी वही
पर अर्थ भिन्न भिन्न
जब एक बात के दो अर्थ
दो कारण हो सकते हैं
जो भी तुम कहते हो
मेरे सोच से उसका अर्थ
भिन्न हो सकता है
तुम क्यों सोचते हो
जो भी तुम कहते हो
मैं उसे वैसे ही समझूं
जैसा तुम चाहते हो
अगर तुम्हारी बात से
मेरा मत नहीं मिलता
तुम नाराज़ होते हो
 नाराज़ होने से पहले
मुझसे भी तो पूछ लो
मेरा सोच क्या कहता है
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर   
72-209-20-08-2013
मत,विचार,सोच,अर्थ  ,गुलाब,जीवन अमृत,

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर   

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