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शुक्रवार, 23 अगस्त 2013

वही सूरज वही धूप वही उजाला


वही सूरज वही धूप
वही उजाला
दिन तो सब के
एक जैसे ही होते हैं
कुछ दिन भर
मुस्काराते रहते हैं
शाम को हँसते हैं
जश्न मनाते हैं
रात को बेफिक्र हो कर
गहरी नींद में सोते हैं
कुछ बदनसीब भी होते हैं
जो दिन भर झूझते हैं
थक कर चूर हो जाते हैं
शाम को उदास
रात को चिंता में डूबे
सुबह के चमकते
उजाले की प्रतीक्षा में
पलक झपकाते रहते हैं
बिना हँसे मुस्काराए
जीवन भर लड़ते रहते हैं
दिन तो सब के
एक जैसे ही होते हैं
डा.राजेंद्र,तेला,निरंतर
79-216-22-08-2013
बदनसीब, जीवन,खुशी,दुःख,सूरज,धूप,उजाला ,

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