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मंगलवार, 20 अगस्त 2013

महकते फूल


चांदी सा चमकते
चमेली के फूल को देखा
काँटों की बीच सुर्ख लाल
गुलाब को झांकते देखा
हर सिंगार के
नन्हे फूल को सुगंध
फैलाते देखा
अंगूठी में जड़े नगीने सा
मोगरे के फूल को देखा
महुआ के फूल को
मदमस्त महक से
बहकते देखा
सब की कद काठी
रंग रूप
पौधे अलग अलग
सबके सब महक के
गुण से भरे हुए
सारे महकते फूल
एक ही सन्देश दे रहे थे
कद काठी रंग रूप
जात बिरादरी  देश
अलग अलग भी हों
तो अंतर नहीं पड़ता
अच्छे गुण इंसान में हो
हर इंसान महकता
संसार में पूजा जाता
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
70-207-20-08-2013
महक,सुगंध,जीवन,गुण,फूल ,गुलाब,चमेली

1 टिप्पणी:

  1. आप ने लिखा... हमने पढ़ा... और भी पढ़ें... इस लिये आप की ये खूबसूरत रचना शुकरवार यानी 23-08-2013 की http://www.nayi-purani-halchal.blogspot.com पर लिंक की जा रही है... आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस हलचल में शामिल रचनाओं पर भी अपनी टिप्पणी दें...
    और आप के अनुमोल सुझावों का स्वागत है...




    कुलदीप ठाकुर [मन का मंथन]

    कविता मंच... हम सब का मंच...

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