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शनिवार, 17 अगस्त 2013

उपलब्धि


मित्र ने रत्न जडित
कीमती घड़ी 
क्या खरीद ली
सुबह से शाम तक
घड़ी का गुणगान
उसकी 
दिनचर्या बन गयी
जीवन की बड़ी 
उपलब्धि हो गयी
कोई पूछे ना पूछे
घड़ी की कीमत बताना
मजबूरी बन गयी
अनायास ही एक दिन
दूसरे मित्र की
कलाई पर दृष्टि पडी
उसने भी वैसी ही
घडी पहन रखी थी
मन की जिज्ञासा 
रोक नहीं पाया
तुरंत उससे पूछ लिया
क्या घडी उसने
होड़ में खरीदी 
भावहीन चेहरा लिए
मित्र बोला
मैं कोई कार्य
होड़ में नहीं करता
भौतिक उपलब्धि को
सर पर नहीं चढ़ाता
भौतिक उपलब्धि 
भाग्य से भी मिल जाती 
व्यक्तित्व की उपलब्धि ही 
सर्वोपरि होती  
निष्फल कर्म में
विश्वास रखता हूँ
मित्र के उत्तर ने
मुझे निरुत्तर कर दिया
उसके प्रति मन में 
सम्मान बढ़ा दिया
डा.राजेंद्र तेला ,निरंतर
63-200-17-08-2013
जीवन दर्शन व्यक्तित्व,जीवन,उपलब्धि,भौतिक,होड़ ,कर्म,

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