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गुरुवार, 15 अगस्त 2013

आज का सत्य


एक गरीब मजदूर को
खिलखिलाकर हँसते देखा
मस्ती में झूमते देखा
तो आश्चर्य से मुंह
खुला का खुला रह गया
खुशी के तांडव का
कारण पूछा तो
चिल्ला कर बोला
बाबूजी हम कितने
खुशकिस्मत हैं
देश के लिए सबसे
आवश्यक हैं
अगर हम नहीं होते तो
कई सरकारें
बनते बनते रह जाती
कई नेताओं की
ज़मानत ज़ब्त हो जाती
कई नेताओं की
कोठियां नहीं
झोंपड़ियाँ होती
हमारे वोट पर ही
सरकारें बनती हैं
हमें लुभाना
नेताओं की मजबूरी है
अब आप ही बताओ
देश में हमसे अधिक
कौन इतना भाग्यशाली है
यह अलग बात है
हम छोटी सी झोंपड़ी में
भूखे पैदा होते हैं
उसी झोंपड़ी में भूखे ही
मर जाते हैं
56-193-15-08-2013
गरीब,मजदूर,नेता,सरकार,आज़ादी,देश,राष्ट्र,वोट,

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

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