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मंगलवार, 13 अगस्त 2013

दुखी मन बोला सुखी मन से


(जीवन अमृत )
दुखी मन बोला सुखी मन से
जब तुम भी मन मैं भी मन
फिर मैं दुखी तुम खुश कैसे
सुखी मन बोला
अधिक पाने की इच्छा में
तुम होड़ में जीते हो
आवश्यकता से अधिक
अपेक्षाएं इच्छाएं रखते हो
मनोकामना पूरी नहीं हो
तो असंतुष्ट हो जाते हो
क्रोध करते हो
तनाव ग्रस्त रहते हो
अगर मेरे जैसे
खुश रहना हो तो
ना अधिक इच्छाएं रखो
ना होड़ में जीओ
स्वयं पर विश्वास रखो
इच्छाएं पूरी नहीं हो तो
इश्वर का आदेश समझ कर
स्वीकार लो
संतुष्टि को लक्ष्य मान कर
कर्म पथ पर चलते रहो
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
46-185-12-08-2013
जीवन अमृत ,तनाव ग्रस्त ,संतुष्टि, इच्छाएं, दुखी,सुखी, मन,इश्वर, अपेक्षाएं, होड़, जीवन

1 टिप्पणी:

  1. आपने लिखा....हमने पढ़ा....
    और लोग भी पढ़ें; ...इसलिए शनिवार 17/08/2013 को
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    पर लिंक की जाएगी.... आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    लिंक में आपका स्वागत है ..........धन्यवाद!

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