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शनिवार, 13 जुलाई 2013

क्यों हमसे घबराते हो ?


क्यों हमसे
घबराते हो ?
देख कर छुप जाते हो
अगर निष्कपट हो 
ह्रदय में पाप नहीं
मन में शक नहीं
तो सामने आओ
आँखों से आँखें मिलाओ
हँस कर बात करो
मन में भ्रम
अगर है कोई तो
निश्चिंत हो कर प्रश्न करो
खुद की दुविधा दूर करो
हमें व्यथा मुक्त करो   
संबंधों को बनाए रखो
14-106-13-07-2013

शक,भ्रम,जीवन,निष्कपट,रिश्ते सम्बन्ध,संवाद
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

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