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बुधवार, 31 जुलाई 2013

उनके दिल जलते रहे

हम अकेले थे 
वो बहुत थे 
नफरत से भरे थे
अहम् में चूर थे 
हमारे सुख 
उनसे देखे ना गए 
वो पत्थर मारते गए
हम चोट खा कर भी
मुस्काराते रहे  
हँसते हँसते 
आगे बढ़ते रहे 
उन के दिल जलते रहे 
समय व्यर्थ करते रहे 
अंत में थक गए
मुकाबले से हट गए 
हम चलते रहे
मंजिल पर पहुँच गए     
डा.राजेंद्र तेला ,निरंतर 
     
47-139-31-07-2013
नफरत,मंजिल,हार ,जीत,जीवन ,ज़िन्दगी

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर      

5 टिप्‍पणियां:

  1. आपने लिखा....हमने पढ़ा....
    और लोग भी पढ़ें; ...इसलिए शनिवार 03/08/2013 को
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    पर लिंक की जाएगी.... आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    लिंक में आपका स्वागत है ..........धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुन्दर और भावपूर्ण रचना |
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.

    उत्तर देंहटाएं