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शुक्रवार, 19 जुलाई 2013

हवा जब वृक्षों से आलिंगन करती है


हवा जब वृक्षों से
आलिंगन करती है
पत्ता पत्ता
डाली डाली झूमने
लगती है
 पत्तों को चूम कर
जब सरसराती हुई
अपने कर्तव्य पथ पर
अग्रसर होती है
खेत खलिहान,
नदी पहाड़ों से मिलने
निकल जाती है
लगता है
मानो सन्देश दे रही हो
प्रेम का अर्थ साथ
रहना ही नहीं होता
दूर रह कर भी
प्रेम करा जा सकता है
प्रेम के लिए 
कर्तव्य पथ से भटकना
 प्रेम नहीं होता
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर  
23-115-19-07-2013
कर्तव्य पथ, सन्देश, प्रेम, कर्तव्य

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