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बुधवार, 31 जुलाई 2013

पहले धरती को जी भर के देख लूं


ना अम्बर की ऊंचाई
नापना चाहता हूँ
ना समुद्र की गहराई
जानना चाहता हूँ
पहले धरती को
जी भर के देख लूं
वृक्षों से जी भर के
बात कर लूं
बहते झरनों में
खुद को भिगो लूं
मचलती हवाओं के
संग मचल लूं
बहती नदी के साथ
अठखेलियाँ कर लूं
सुन्दर फूलों को 
निहार लूं
उसके बाद ही
अम्बर की ऊंचाई
समुद्र की गहराई के
बारे मैं सोचूंगा
तब तक धरती की
सुन्दरता का
आनंद लेता रहूँगा
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
45-137-31-07-2013
प्रकृति,पर्यावरण,अम्बर,धरती,वृक्ष,समुद्र,नदी

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