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बुधवार, 17 जुलाई 2013

बात सच्ची थी मगर अनजाने में हुयी गलती थी


बात सच्ची थी मगर 
अनजाने में हुयी गलती थी 
ये नहीं समझा तुमने 
बस बात को ह्रदय से लगा लिया 
हर गुहार को अनदेखा कर दिया  
रिश्तों में अवरोध खडा कर दिया 
कुंठित मन का सबूत दे दिया 
अब भी कुछ बिगड़ा नहीं 
बस एक कदम आगे बढ़ाना है  
बहम का पर्दा मन से हटाना है
ह्रदय के पट खोल कर 
कहाँ ज़ख्म लगा बताना है
दो कदम मैं भी आगे बढूंगा 
सच्चाई को स्वीकार करूंगा
चाहोगे तो विछोह की सज़ा 
भुगतने के बाद 
और सज़ा भी भुगत लूंगा
रिश्तों के बीच से अवरोध हटा दूंगा 
मन में छाये 
बहम के काले बादलों को
सदा के लिए हटा दूंगा 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
19-111-17-07-2013

रिश्ते,बहम,शक,सम्बन्ध ,

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