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शुक्रवार, 12 जुलाई 2013

आदमी से लड़ रहा है आदमी


खुद से लड़ रहा है आदमी
अपने परायों से लड़ रहा है आदमी
आदमी से लड़ रहा है आदमी
जीत किसी से नहीं रहा है आदमी
अहम् से हार रहा है आदमी
होड़ में उलझ गया है आदमी
भ्रम जाल में फंस गया है आदमी
पथ से भटक गया है आदमी
कितना कमज़ोर हो गया है आदमी
जान कर भी अनजान बन रहा है आदमी

11-103-10-07-2013डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
जीवन,अहम्,आदमी,इन्सान   

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