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शुक्रवार, 3 मई 2013

जो मर गया देश के खातिर



जो मर गया
देश के खातिर
उसे मर जाने दो
दिखाने के लिए
दो बूँद आसूं
तुम भी बहा लो
वो रोते रहेंगे
जिनका कोई अपना
संसार से जाएगा
घर परिवार
बेघर हो जाएगा
तुम कल से फिर
काम में लग जाओगे
अपनी दुनिया में
खो जाओगे
सीना चौड़ा कर
खुद को देश भक्त
कहते रहोगे
देश के लिए जान
दे सकते हो
डींग मारते रहोगे
35-91-18-02-2013
शहीद,देश देश भक्त
राजेंद्र तेला,निरंतर

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपको यह बताते हुए हर्ष हो रहा है के आपकी इस विशेष रचना को आदर प्रदान करने हेतु हमने इसे आज दिनांक ८ मई, २०१३, बुधवार के ब्लॉग बुलेटिन - कर्म की मिठास में शामिल किया है | कृपया बुलेटिन ब्लॉग पर तशरीफ़ लायें और बुलेटिन की अन्य कड़ियों का आनंद उठायें | हार्दिक बधाई |

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  2. बहुत ही सुन्दर रचना.बहुत बधाई आपको .

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