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रविवार, 21 अप्रैल 2013

अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गयी खेत



मित्र को बाहों में
सर छुपाये बैठा देखा
विषाद का कारण पूछा
रुआंसा होकर बोला  
पहले मैं हंसता था सब पर
आज सब मुझ पर हँस रहे हैं
ताने दे रहे हैं
हम नहीं कहते थे
उनकी हर बात मत मानो
इतना सर पर ना चढाओ
एक दिन पछताओगे
हमारी बातों को याद करोगे
तब समझ नहीं आया था
लाड प्यार देता रहा
हर इच्छा पूरी करता रहा
कमियाँ छुपाता रहा
काले को सफ़ेद कहता रहा
आज जब पानी सर से
ऊपर निकल गया
अब पछताए होत क्या
जब चिड़िया चुग गयी खेत
का अर्थ समझ आ गया
अब पछताए होत क्या
28-84-16-02-2013
जब चिड़िया चुग गयी खेत,विषाद,दुःख
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर  

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