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बुधवार, 20 मार्च 2013

तुम्हारी तो खबर भी नहीं



तुम्हारी तो
खबर भी नहीं
कुछ अपना हाल ही
बता दूं 
तुम्हारे जैसे ही
रातों को जागता हूँ
ख्यालों में खोता हूँ
अकेले में रोता हूँ
फर्क सिर्फ इतना सा है
मैं बता कर
कुछ लम्हों के लिए 
सुकून पा लेता हूँ
तुम तो
इतना भी नहीं करती हो
घुट घुट कर जीती हो
गरूर में चुप रहती हो
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
39-39-20-01-2013
गरूर,खबर,मोहब्बत  
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर    

1 टिप्पणी:

  1. मैं बता कर
    कुछ लम्हों के लिए
    सुकून पा लेता हूँ...

    बहुत ही सुन्दर

    उत्तर देंहटाएं