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सोमवार, 18 मार्च 2013

अगर तुम्हें समझना चाहूँ



अगर 
तुम्हें समझना चाहूँ
मुझे भी तुम्हारे जैसे 

सोचना होगा
तुम मुझे समझना चाहो
तुम्हें भी
मेरे जैसे ही सोचना होगा
  यह आसान नहीं होगा
हमें
अहम् को छोड़ना होगा
एक दूसरे की स्थिति,
परिस्थिति का ध्यान
रखना होगा
स्वयं को दूसरे के

 स्थान पर रख कर 
सोचना होगा
तभी हम एक दूसरे को
समझ पायेंगे
नहीं तो स्वयं को सही
दूसरे को गलत कहते रहेंगे



© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
 
35-35-18-01-2013
सम्बन्ध,रिश्ते,समझना ,अहम्
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

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