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रविवार, 3 मार्च 2013

उनका चेहरा

कल रात लिखने बैठा तो
ख्यालों में अचानक 
उसका चेहरा सामने आ गया
दुविधा में फंस गया,
लिखने में ध्यान लगाऊंगा
तो चेहरे से ध्यान हटाना पडेगा
चेहरा देखता रहूँगा
तो कुछ लिख नहीं पाऊंगा
उहापोह में सारी रात
कलम हाथ में लिए बैठा रहा
कलम से तो कुछ नहीं लिख सका
पर इतनी लम्बी देर तक
उनके चेहरे को निहारने का 
आनंद अवश्य मिला 
उनकी सुन्दरता पर
लिखने के लिए कलम को
बहुत कुछ मिल गया
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
06-06-03-01-2013
प्रेम,प्रियतम ,मोहब्बत,प्यार ,विरह

2 टिप्‍पणियां:

  1. वाह!
    आपकी यह प्रविष्टि कल दिनांक 04-03-2013 को सोमवारीय चर्चा : चर्चामंच-1173 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत खूब

    मेरी नई रचना
    आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में
    पृथिवी (कौन सुनेगा मेरा दर्द ) ?

    ये कैसी मोहब्बत है

    उत्तर देंहटाएं