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गुरुवार, 14 मार्च 2013

ऐ दोस्त .....



ऐ दोस्त
हमारी छोटी सी खता को
तुमने दिल में उतार लिया
हमें दिल से ही निकाल दिया
हम दिल में तुम्हारे जैसी
तल्खी तो नहीं रखते
मलाल सिर्फ इस बात का है
तुमने ये भी नहीं बताया
 हमारी खता क्या है
इक बार हमारे दिल में
झाँक कर देखो
कमजोरियों के
चंद छोटे काँटों के अलावा
मोहब्बत के फूलों से भरा है
इंसानियत की महक से
महक रहा है
फिर भी तुम अगर
हमें गुनाहगार मानते हो
खुदा की रज़ा समझ
मंज़ूर कर लेंगे
ना आसूं बहायेंगे
ना नाराज़ होंगे
हँसते हँसते जीते रहेंगे
तुम्हारे दिल में पल रहे
नफरत के शज़र सूख जाएँ
मोहब्बत के फूल महक जाएँ
इंसान बन कर जी सको
तुम्हारे लिए खुदा से
दुआ करते रहेंगे
25-25-14-01-2013    
तल्खी,खता,शायरी,नज़्म,इंसानियत,मोहब्बत,दोस्त 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

1 टिप्पणी:

  1. बहुत उम्दा सुंदर प्रस्तुति,,,

    बीबी बैठी मायके , होरी नही सुहाय
    साजन मोरे है नही,रंग न मोको भाय..
    .
    उपरोक्त शीर्षक पर आप सभी लोगो की रचनाए आमंत्रित है,,,,,
    जानकारी हेतु ये लिंक देखे : होरी नही सुहाय,

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