ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

बुधवार, 27 फ़रवरी 2013

मैं कुंठित नहीं हूँ



मैं कुंठित नहीं हूँ
जो किसी से प्रशंसा की
आशा करूँ
किसी के आलोचना
करने पर क्रोध करूँ
किसी के पैमाने पर
खरा उतरने के लिए
सिद्धांतों से समझौता करूँ
मैं जैसा भी हूँ
वैसा ही हूँ
पर कुंठित हो कर
जीता नहीं हूँ
निरंतर लिखता रहता हूँ
खुश रहता हूँ
मन को संतुष्ट रखता हूँ
जो भी स्वीकार करे
उसे भी नमन
जो ना करे उसे भी
नमन करता हूँ
01-01-01-01-2013
कुंठित,संतुष्ट,संतुष्टि
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर  

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 02/03/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  2. सकारात्मक सोच का परिचय ...बहुत खूब

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत ही सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति ...

    उत्तर देंहटाएं
  4. सकारात्मक्ता से जीना ही जीवन है
    सार्थक विचार........
    साभार

    उत्तर देंहटाएं