ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

बुधवार, 6 फ़रवरी 2013

हमने आज़ाद हो कर क्या देखा



हमने आज़ाद हो कर क्या देखा
=====================
हमने आज़ाद हो कर
क्या देखा
जो देखा खवाबों में भी
नहीं सोचा
रिश्तों को
तार तार होते देखा
बेटे को बाप को
गाली देते देखा
माँ बहन को सरे बाज़ार
ज़लील होते देखा
कमज़ोर को ताकतवर से
मार खाते देखा
गरीब को
अधिक गरीब होते देखा
किसानों को
आत्मह्त्या करते देखा
बेईमानों को
मालामाल होते देखा
राज़ करने वालों को
ऐशों आराम करते देखा
अब आम आदमी को
आम आदमी के लिए
राज करने के सिवाय
कुछ देखने की इच्छा
बाकी नहीं है

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
950-68-15-12-2012
स्वाधीनता,आजादी,आज़ाद,देश

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें