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रविवार, 3 फ़रवरी 2013

मन कहता है



मन कहता है
कहीं कोई मेरा
अपना तो है
उम्मीद की नकाब से
ढका कोई चेहरा तो है
मिलेगा या नहीं
ये अलग बात है
आस में
ज़िंदा रखता तो है
944-62-15-12-2012
शायरी,उम्मीद

7 टिप्‍पणियां:


  1. बहुत खुबसूरत आस है -- कभी भूलकर इधर भी नजर डाल लें - बहुत बहुत शुभ कामनाएं
    New post बिल पास हो गया
    New postअनुभूति : चाल,चलन,चरित्र

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह!
    आपकी यह प्रविष्टि कल दिनांक 04-02-2013 को चर्चामंच-1145 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  3. ज़िन्दगी में उम्मीद न हो तो कुछ भी नहीं है | उम्मीद ही ज़िन्दगी जीने का होंसला देती है | सुन्दर रचना | आभार |

    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

    उत्तर देंहटाएं