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बुधवार, 27 फ़रवरी 2013

कोई रात अंधेरी नहीं होती



कोई रात
अंधेरी नहीं होती
कोई दिन
उजला नहीं होता
केवल रोशनी की कमी
या अधिकता होती
मन संतुष्ट
ह्रदय प्रसन्न हो तो
काली रात उजली
उजले दिन में भी
अन्धेरा लगता
978-95-30-12-2012
मन,ह्रदय,संतुष्ट,संतुष्टि

3 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत उम्दा ..भाव पूर्ण रचना .. बहुत खूब अच्छी रचना इस के लिए आपको बहुत - बहुत बधाई

    आज की मेरी नई रचना जो आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार कर रही है

    ये कैसी मोहब्बत है

    खुशबू

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत ही सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति ...

    आप भी पधारें
    ये रिश्ते ...

    उत्तर देंहटाएं