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सोमवार, 11 फ़रवरी 2013

वास्तविकता की उड़ान



वास्तविकता की उड़ान में
भाव मेरे भी बहते हैं
घाव मेरे भी रिसते हैं
अब जब तुम बन गए हो
हमराज मेरे
दर्द अवश्य कम हो जायेंगे
एक दूजे को तराशेंगे
हँसते हुए जियंगे
मिल कर हम दोनों
गीत खुशी के गायेंगे
957-75-15-12-2012
हमराज़,जीवन,खुशी,वास्तविकता

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