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रविवार, 24 फ़रवरी 2013

तेरे बगैर



बोतल भरी शराब की
आँखों के सामने
मगर पीने का मन
नहीं करता
घर के बगीचे में
खूबसूरत फूल खिले
मगर देखने का मन
 नहीं करता
हमें हाँसिल हैं
हर तरह की खुशहालियाँ
मगर तेरे बगैर जीने का
मन नहीं करता
974-91-19-12-2012
शायरी ,तेरे बगैर, मोहब्बत

4 टिप्‍पणियां:

  1. वाह!
    आपकी यह प्रविष्टि कल दिनांक 25-02-2013 को चर्चामंच-1166 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत खूब अच्छी रचना इस के लिए आपको बहुत - बहुत बधाई

    मेरी नई रचना

    मेरे अपने

    खुशबू
    प्रेमविरह

    उत्तर देंहटाएं