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शुक्रवार, 1 फ़रवरी 2013

दुश्मनी बोली मुझसे एक दिन



दुश्मनी बोली
मुझसे एक दिन
क्यों रोज़
नए दोस्त बनाते हो
इतने दोस्तों को
दुश्मन बनते देख लिया
फिर भी नहीं घबराते हो
मैं बोला
तुम बिगाड़ने में
यकीन रखती हो
मैं बनाने में यकीन
रखता हूँ
स्वभाव से जिद्दी हूँ
उसूलों पर जीता हूँ
तेरे जैसे रोज़ चेहरा नहीं
बदलता हूँ
तूँ थक जायेगी
मगर मैं नहीं थकूंगा
मरते दम तक
दोस्त बनाता रहूँगा
उनके कंधे पर ही
आख़िरी सफ़र पर
जाऊंगा 


© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
 
941-59-15-12-2012
दुश्मनी,दोस्ती,ज़िन्दगी,जीवन ,उसूल

2 टिप्‍पणियां:

  1. jise Log Daant dikhaalaate rahte hon ....
    dushman uske duniyaa mein kyon kar hon ....
    Sadoo.... peer ki lakir par ka aakhron ka shilp
    Ek "Doc." hi gadh saktaa hain .....

    उत्तर देंहटाएं