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रविवार, 6 जनवरी 2013

आइना देखते देखते



आइना देखते देखते
बचपन पीछे छूट गया
चेहरा झुर्रियों से भर गया
समय की थकान बताने लगा
आइना न बदला
 सदा मुस्काराता रहा
कहता रहा
लाख बन संवर लो
समय की मार से
कोई नहीं बच सका
तुम कितने दिन बचोगे
एक दिन तुम भी
आइना देखना छोड़ दोगे
डा.राजेंद्र तेला,निरन्तर
885-04-02-12-2012
जीवन.आइना,मृत्यु

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