ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

शनिवार, 19 जनवरी 2013

ज़ज्ब हो चुका हूँ तुम्हारे ज़हन में



मुझे पता है
मेरे नाम तक से
तौबा करते हो
पर जब भी 
मेरा नाम आता है
चाहे नफरत से ही सही
बड़े ध्यान से सुनते हो
कितना भी दिल से निकालो
चाहे दुश्मन समझो मुझको
इतना ज़ज्ब हो चुका हूँ
तुम्हारे ज़हन में
तुम चाहकर भी मुझे
भुला नहीं पाओगी
तुम्हारी बेवफाई
तुम्हें हमेशा सताती रहेगी
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
912-30-08-12-2012
नफरत,बेवफाई,शायरी

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 23/01/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुंदर शब्द.बेह्तरीन अभिव्यक्ति .शुभकामनायें.

    उत्तर देंहटाएं