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गुरुवार, 3 जनवरी 2013

अँधेरे से आये थे,अँधेरे में जाना है



अँधेरे से आये थे
अँधेरे में जाना है
उजाले के
कुछ पल मिले हैं
उन्हें नहीं खोना है
न रोना है
न रुलाना है
जीवन को मुखर
बनाना है
इश्वर को याद
रखना है
रोते हुए आये थे
हँसते हुए जाना है

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
879-63-28-11-2012
जीवन ,मृत्यु

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