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शुक्रवार, 4 जनवरी 2013

पीड़ित मन



पीड़ित मन से
रोते रोते अचानक
ख्याल आ गया
रोने से किसी को नहीं मिला
तो मुझे कैसे मिलेगा
मन की व्यथा कम करनी है
तो क्यों ना
किसी अपने से बात कर लूं
जो मन को पसंद हो
वो काम कर लूं
अच्छा संगीत सुन लूं
अच्छी किताब पढ़ लूं
मन को हल्का कर लूं
अपने को व्यवस्थित कर लूं
फिर से काम में जुट जाऊं
फिर कभी व्यथित ना होऊँ
ऐसा सोच रख लूं
जो होना है वो हो कर रहेगा
रोने से किसी को नहीं मिला
तो फिर मुझे कैसे मिलेगा
880-64-28-11-2012
व्यथा,व्यथित,मन,पीड़ा,जीवन

2 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर प्रस्तुति बहुत ही अच्छा लिखा आपने .बहुत ही सुन्दर रचना.बहुत बधाई आपको

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