ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

रविवार, 27 जनवरी 2013

कौन है जो नहीं जानता



कौन है
जो नहीं जानता
खुद कितना इमानदार
कितना बेईमान है
फिर भी
दूसरों पर ऊंगली उठाता है
भूल जाता है
कब तक सच छुपायेगा
चेहरे पर चेहरा लगाएगा
कोई तो होगा 
जो उसकी 
फितरत को जानता है
कभी उका भी सच
बाहर आ जाएगा
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
929-47-12-12-2012
सच,झूठ,इमानदार,दोगलापन

4 टिप्‍पणियां:

  1. प्रभावशाली ,
    जारी रहें।

    शुभकामना !!!

    आर्यावर्त
    आर्यावर्त में समाचार और आलेख प्रकाशन के लिए सीधे संपादक को editor.aaryaavart@gmail.com पर मेल करें।

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह!
    आपकी यह प्रविष्टि को आज दिनांक 28-01-2013 को चर्चामंच-1138 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  3. हर इंसान के चेहरे पर कोई न कोई मुखौटा हर पल लगा ही रहता है | आपने बिलकुल सच लिखा है |

    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

    उत्तर देंहटाएं