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शनिवार, 26 जनवरी 2013

जब आस ख़त्म हो जाती



जब आस
ख़त्म हो जाती
दिल टूट जाता है
मन दुखी रहता है
आसूं सूख जाते हैं
ज़िन्दगी दोजख
लगती है
जीना मौत से भी
दुश्वार लगता है
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर  
927-45-12-12-2012
शायरी,आस,दुश्वार

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 30/01/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  2. सुंदर रचना ,गणतंत्र दिवस की शुभ कामनाएं

    उत्तर देंहटाएं
  3. बिलकुल सही...
    संवेदनशील रचना....

    उत्तर देंहटाएं