ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

रविवार, 20 जनवरी 2013

उन्हें शक था



कुछ कहना चाहता था
कुछ सुनना चाहता था
मन से मन मिलाना
चाहता था
कुछ लम्हों के लिए
सुकून पाना चाहता था
नहीं थी किस्मत में
मेहरबानियाँ उनकी
बात करना तो दूर
हमारी तरफ
झांका तक नहीं
उन्हें शक था
उनसे दिल लगाना
चाहता
913-31-08-12-2012
शक

6 टिप्‍पणियां:

  1. दिल की बात दिल में रह गई ,काश !!कह पाते .अच्छा प्रस्तुति
    New post : शहीद की मज़ार से
    New post कुछ पता नहीं !!! (द्वितीय भाग )

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह!
    आपकी यह प्रविष्टि को कल दिनांक 21-01-2013 को सोमवारीय चर्चामंच पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  3. दिल लगाने की बात करते हो......!
    बहुत खूब.....!

    उत्तर देंहटाएं
  4. अच्छा प्रस्तुति, बहुत खूब****** कुछ लम्हों के लिए
    सुकून पाना चाहता था
    नहीं थी किस्मत में
    मेहरबानियाँ उनकी
    बात करना तो दूर
    हमारी तरफ
    झांका तक नहीं
    उन्हें शक था
    उनसे दिल लगाना
    चाहता
    913-31-08-12-2012

    उत्तर देंहटाएं