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शनिवार, 12 जनवरी 2013

जब कोई मेरा अपना व्यथित हो तो




लोग पूछते हैं
आप व्यथित क्यों रहते हो
 गंभीर चेहरा लिए दिखते हो
जवाब में जब कहता हूँ
जब कोई अपना व्यथित हो तो
मैं कैसे खुश रह सकता हूँ
सुनने को मिलता है
आपके परिवार वाले तो
सब खुश दिखते हैं
फिर आप ऐसा क्यों कहते हैं
कैसे समझाऊँ 
केवल परिवार वाले
अपने नहीं होते
जो भी प्रेम रखते हैं
जिनसे भी मन मिलता है
वो भी तो अपने ही हैं
उनमें से एक भी अगर
व्यथित है
तो फिर मैं कैसे खुश
रह सकता हूँ
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 

892-11-03-12-2012
रिश्ता,अपनापन,व्यथित,व्यथा,अपने,पराये, खुशी

2 टिप्‍पणियां:

  1. प्रभावशाली ,
    जारी रहें।

    शुभकामना !!!

    आर्यावर्त (समृद्ध भारत की आवाज़)
    आर्यावर्त में समाचार और आलेख प्रकाशन के लिए सीधे संपादक को editor.aaryaavart@gmail.com पर मेल करें।

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