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मंगलवार, 1 जनवरी 2013

अगर चाहूँ रात सवेरे ही आ जाए



अगर चाहूँ
रात सवेरे ही आ जाए
सवेरा रात को हो जाए
चाँद सूरज  सा
सूरज चाँद सा चमकने लगे
मनुष्य घोंसलों में
पक्षी घरों में रहने लगे
तुम कहोगे संभव नहीं
फिर सदकर्म बिना
मन में इर्ष्या,द्वेष,रख कर
चरित्रहीन बन कर
कुत्सित विचार रख कर
इश्वर कैसे मिलेगा
चाहे मंदिर जाओ
मस्जिद जाओ
रामायण पाठ करो 
क़ुरान पढो
काशी जाओ 
काबा जाओ
न इश्वर मिलेगा
न अल्ला मिलेगा
स्वर्ग की चाह में
नर्क अवश्य मिलेगा
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
873-57-28-11-2012
इश्वर,सद्कर्म,इर्ष्या,द्वेष,जीवन

2 टिप्‍पणियां:

  1. बेह्तरीन अभिव्यक्ति

    नब बर्ष (2013) की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    मंगलमय हो आपको नब बर्ष का त्यौहार
    जीवन में आती रहे पल पल नयी बहार
    ईश्वर से हम कर रहे हर पल यही पुकार
    इश्वर की कृपा रहे भरा रहे घर द्वार.

    उत्तर देंहटाएं
  2. प्रभावी लेखनी,
    नव वर्ष मंगलमय हो,
    बधाई !!

    उत्तर देंहटाएं