Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

शनिवार, 22 दिसंबर 2012

अनबूझा संसार



निस्तब्ध हूँ
निश्चल हूँ
कोई पीड़ा नहीं
कोई वेदना नहीं
ना खुश हूँ
ना दुखी हूँ
भावना रहित हूँ
कोई दोस्त नहीं
कोई दुश्मन नहीं
कोई अपना नहीं
कोई पराया नहीं
कोई सोच नहीं
कोई इच्छा नहीं
कष्टों से मुक्त हूँ
धरती से दूर
एक अनबूझे
संसार में हूँ
मैं मृत हूँ
853-37-21-11-2012
जीवन ,ज़िन्दगी , अनबूझा संसार,मृत्यु,मृत,मौत

कू-ब-कू भटकता रहा



कू-ब-कू भटकता रहा
दर्द बिना कोई न मिला
जो भी मिला उसने कहा 
कैसे कहूं कोई दर्द नहीं है 
एक शख्श हँसता मिला
मैंने पूछा 
क्या तुम्हें कोई गम नहीं
नम आँखों से कहने लगा
क्यूं मेरी बात पर 
यकीन नहीं करते 
कह तो रहा हूँ
मुझे कोई दर्द नहीं
कहते कहते 
वह अश्क बहाने लगा
मैं भी जिद पर अड़ गया
उसके दर्द को बढ़ा दिया
फिर सवाल दाग दिया
इतना रो रहे हो
फिर भी क्यूं कहते हो
तुम्हें कोई दर्द नहीं
वो फूट फूट कर रोने लगा
सुबक सुबक कर कहने लगा
कुछ लम्हे मन को
सुकून देने के लिए कहता हूँ
मुझे कोई दर्द नहीं
तुमने वह भी नहीं करने दिया
डा.राजेंद्र तेला,निरन्तर 


कू-ब-कू =गली गली ,जगह जगह
852-36-20-11-2012
जीवन ,ज़िन्दगी ,दुःख,दर्द,सुकून

शुक्रवार, 21 दिसंबर 2012

ये चेहरा सफ़ेद नहीं है



ये चेहरा सफ़ेद नहीं है
दिलों में नफरत को
पनपते देख कर
खून सूख गया है
हवा के झोंकों में भी
अहम् भर गया है
ईमान को
पूजने वालों का जीना
दुश्वार हो गया है
हँसना मुस्काराना
मुश्किल हो गया है
जहन में फरेब का
डर बैठ गया है
ये चेहरा सफ़ेद नहीं है
खौफ से
सफ़ेद हो गया है
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
851-35-20-11-2012
ईमान ,फरेब ,जीवन ,ज़िन्दगी

खुशी मनाने से नहीं मनती



खुशी मनाने से
नहीं मनती
मन से मनती हैं
बाज़ार में नहीं बिकती
धन से नहीं मिलती
ह्रदय में दुःख
मन में बेचैनी हो
अवसर कोई भी हो
खुशी नहीं मिलती
दिखाने को कह दो
दुनिया से झूठ बोल दो
लाख मन को समझा लो
मन की 
संतुष्टी बिना 
खुशी कभी नहीं मिलती
डा.राजेंद्र तेला,निरन्तर 
850-34-20-11-2012
खुशी ,संतुष्टी

गुरुवार, 20 दिसंबर 2012

त्योंहार बहुत मना लिए



त्योंहार
बहुत मना लिए
दीपक बहुत जला लिए
पटाखे भी चला लिए
घर सजा दिए
पकवान खा लिए
बहुत हँस लिए
बहुत गा लिए
मन का दीपक
कब जलाओगे
ह्रदय से कब
मुस्काराओगे
भाईचारे से कब जियोगे
ईमान को जीने का
पैमाना कब बनाओगे
क्या सोचा कभी ?
या झूठ की
दुनिया में जिए जाओगे
आत्मा परमात्मा को
धोखा देते जाओगे
उसके दरबार में 

सज़ा पाओगे
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
849-33-20-11-2012
त्योंहार,दीपावली,ईमान .भाईचारा,जीवन

बुधवार, 19 दिसंबर 2012

सब करते हैं इसलिए मैं भी करता रहा हूँ



स्वयं को पढ़ा लिखा
विद्वान समझता हूँ
पर आज तक समझ
नहीं पाया
क्यों मूर्तियों की पूजा
करता हूँ
सब करते हैं इसलिए
मैं भी करता रहा हूँ
करता रहूँगा
उचित अनुचित का
प्रश्न नहीं उठाऊंगा
भीड़ के साथ चलता रहा हूँ
चलता रहूँगा
अलग चलने का प्रयत्न
करूंगा
तो पत्थर खाऊंगा
848-32-20-11-2012
मूर्ती पूजा,धर्म,जीवन,भेड़ चाल,भीड़

क्या पा लिया तुमने



क्या पा लिया तुमने
ज़िन्दगी भर ईमान की
उसूल की बातें करी तुमने
हर शख्श को
नाराज़ किया तुमने
दिल का चैन
मन का सुकून खोया तुमने
रिश्तों को तोड़ा
मन को दुखी किया तुमने
अपनों को
पराया किया तुमने
क्या मिला तुमको
सिर्फ नफरत ने
साथ दिया तुम्हारा
बेचैनी से
रिश्ता बनाया तुमने
अब भी वक़्त है
ज़माने के साथ चलो
मन में खार
दिखाने को प्यार रखो
ऊपर से नर्म दिखो
अन्दर से पत्थर हो जाओ
या फिर चुपचाप
ज़ख्म खाते जाओ
ना शिकवा करो
ना शिकायत करो
जुबां को लगाम दो
खुदा से दुआ करो
जो भी जैसा भी है
बर्दाश्त करो
घुट घुट कर मरते रहो
दुनिया से चले जाओ
847-31-20-11-2012
ज़िन्दगी , ईमान ,उसूल, सुकून ,रिश्तों ,मन

मंगलवार, 18 दिसंबर 2012

सोना चाह रहा हूँ पर सो नहीं पा रहा हूँ



सोना चाह रहा हूँ
पर सो नहीं पा रहा हूँ
सोऊँ भी कैसे
मन परेशान हो तो
नींद भी कहाँ आती है
नींद भी मज़े ले रही है
कहती है
मन को खुश करो तो आऊँ
दुखी मन में आ कर भी
क्या करूँ
तुम तो दुखी हो
मुझे भी दुखी करोगे
मैं दरवाज़े पर खडी
इंतज़ार कर रही हूँ
जब थक जाओगे
तो बिना बुलाये ही
आ जाऊंगी
846-30-16-11-2012
नींद,निद्रा,खुशी,चैन,बेचैनी

मेरे देश की मिट्टी में बसी है, शहीदों के बलिदान की सुगंध


मेरे देश की 
मिट्टी में बसी है
शहीदों के 
बलिदान की सुगंध
वीरांगनाओं की
चिता की गर्मी
मेरे देश की 
हवा में गूंजती है
संतों,महापुरुषों की
अमर वाणी
त्याग बलिदान की
अमिट कहानी
मेरी देश की
नदियों में बहती है
प्रेम भाई चारे की धारा
मेरे देश की
संस्कृति में घुली है
सत्य अहिंसा
मान मर्यादा
मेरे देश की मिट्टी को
दूषित मत करो
मेरे देश की हवाओं को
प्रदूषित मत करो
देश के लिए 
जान न्योछावर 
करने वालों की
आत्माओं को
व्यथित मत करो
मेरे देश की धरती को
माँ कहते हो
समय आ गया है
पानी सर से 
गुजर गया है
अब देश को
भ्रष्टाचार से मुक्त करो
भ्रष्टाचारियों को 
सजा दो
देश के दुश्मनों का
सफाया कर दो
धरती माँ की 
लाज रख लो
स्वतंत्रता का 
नाश मत करो
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
 
845-29-16-11-2012
भारत,देश,देश भक्ति,शहीद,राष्ट्र,भ्रष्टाचार,

सोमवार, 17 दिसंबर 2012

चिंगारी



पटाखे की
एक चिंगारी
फूस की झोंपड़ी
पर आ गिरी
क्षणों में
झोपडी जल कर
राख हो गयी
वो घर से
बेघर हो गयी
लोगों की
दीपावली मनी

उसके घर की
होली जली
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
844-28-16-11-2012
चिंगारी ,होली,दीपावली

ख्याल उमड़ रहे मन में ,उन्हें आने से क्यों रोकूँ



ख्याल उमड़ रहे मन में
उन्हें आने से क्यों रोकूँ
लफ्ज़ निकल रहे कलम से
उन्हें रोकूँ तो भी क्यों रोकूँ
हाल-ऐ-दिल सुनाने को बेताब हूँ
खुद को रोकूँ भी तो क्यों रोकूँ
बचे नहीं दुनिया में
दिल की सुननेवाले
सब लगे हैं अपनी सुनाने में
तो पढने वालों को क्यों रोकूँ
जानता हूँ ना देगा कोई सहारा
ना समझेगा बात मन की
भूले से भी गर दे दी
दुआएं किसी ने
उसे दुआ देने से क्यों रोकूँ
843-27-16-11-2012
ख्याल,विचार,हाल-ऐ-दिल ,शायरी

तुम सुनते रहो मैं कहता रहूँगा



तुम सुनते रहो
मैं कहता रहूँगा
हाल-ऐ-दिल बयान
करता रहूँगा
जब थक जाओगे
मेरे फसानों को
सुनते सुनते
चुप हो जाओगे
मैं भी चुप हो जाऊंगा
सब्र से
दर्द सुनने वालों की
तलाश में लगा रहूँगा
842-26-11-11-2012
शायरी, हाल-ऐ-दिल,बयान ,दर्द,गम

रविवार, 16 दिसंबर 2012

कैसे जानूं



कौन दुश्मन कौन दोस्त 
कैसे जानूं 
जो हँस के मिले उसे दोस्त
जो ना हँसे
क्या उसे दुश्मन मान लूं
जो रहे गंभीर
ज़ाहिर ना कर पाए
मगर दिल से चाहे 
क्या उस पर ज़ुल्म करूँ
या जो चेहरे पर चेहरा
चढ़ाए
जेब में खंजर छुपाये
हँस कर गले मिले
उससे गले मिलूँ
दुश्मन को दोस्त समझ लूं
ज़माने की चाल चलूँ
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
841-25-11-11-2012
दुश्मन,दोस्त

गम अब सहारा बन गए हैं



गम अब
सहारा बन गए हैं
झूठी उम्मीदों से
बचा रहे हैं
ख़्वाबों की दुनिया से
दूर ले जा रहे हैं
दिल के
बहम मिटा रहे हैं
ज़िन्दगी की
हकीकत समझा रहे हैं
तकलीफ की जगह
सुकून दे रहे हैं
840-24-11-11-2012
गम,सुकून,शायरी,