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शनिवार, 10 नवंबर 2012

उम्र के साथ सूरत बदल गयी



उम्र के साथ
सूरत बदल गयी
मगर ना
ना अंदाज़ बदला
ना सीरत बदली
गनीमत है
ज़ज्बा पहले से
बेहतर हुआ
तमन्नाएं घट गयी
उम्मीदें बरक़रार रही
सुकून मिल जाए
इतनी सी इच्छा
पहले भी थी
अब भी ख़त्म नहीं हुयी

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
769-14-09-10-2012
उम्र,सूरत,सीरत,ज़ज्बा ,तमन्नाएं,उम्मीदें,सुकून

शुक्रवार, 9 नवंबर 2012

समझ नहीं पाया जब देखा मैंने



समझ नहीं पाया
जब  हर शख्श को
चेहरे पर चेहरा लगा कर
घूमते देखा
मोहब्बत की जगह
ज़ख्म देते देखा
दिन रात खुदा की
इबादत करी
मिन्नतों के बाद
उसने राज़ बताया
ज़न्नत में बहुत बड़ा
घोटाला हो गया है
जिन्हें तुम
ज़मीन पर ढूंढ रहे हो
वो घबराकर
ज़न्नत में बस गए हैं
जिन्हें दोजख में
होना चाहिए था
वो ज़मीन पर पहुँच गए हैं
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
768-13-09-10-2012
घोटाला, ज़न्नत, दोजख

कबीर बनना चाहता हूँ



कबीर बनना
चाहता हूँ
सीधे सपाट शब्दों में
अपनी बात दुनिया तक
पहुचाना चाहता हूँ
कोई पुरूस्कार ना मिले
कोई किताब ना छपे
कुछ फर्क नहीं पडेगा
मुझ को पढने वाले
मेरी बात समझ ले
बस इतनी सी तमन्ना
रखता हूँ
आत्म संतुष्टी के लिए
लिखता हूँ
अगर किसी का भला 
हो जाए
दो पल भी खुश हो जाए 
उसे ही पुरूस्कार
समझता हूँ
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
767-12-07-10-2012
कबीर 

गुरुवार, 8 नवंबर 2012

वसंत आया


वसंत आया
वसंत आया
महुआ के पेड़ पर
छा गया
हर डाली को पुष्पों से
लाद दिया
महक ने भंवरों को
आकर्षित किया
आसक्त भंवरों का
गुंजन हवाओं में
गूंजने लगा 
शहद की मक्खियों ने
पराग का रसस्वादन
प्रारम्भ किया
कोयल कूंकने लगी
चारों ओर महुआ की
सुगंध फैलने लगी
हर प्रेमी के दिल में
मदहोशी छाने लगी
प्रेमिका से मिलने की
तड़प बढ़ने लगी
महुआ शीतल बयार में
मदहोश कर
दुनिया को बताने लगा
आओ मस्ती में झूमें गायें
वसंत आ गया
766-11-07-10-2012
वसंत 

मोहब्बत मंजिल रही है मोहब्बत ही मंजिल रहेगी


मोहब्बत मंजिल रही है मोहब्बत ही मंजिल रहेगी
कितनी अजीब हाल
ज़िन्दगी  का
कभी ज़मीन प्यारी लगती
कभी ज़मीन से दूर
आसमान प्यारा लगता
कभी मन कहता
ज़मीन पर ही ज़िन्दगी
काट दूं
कभी मन कहता
ज़मीन से रुखसत ले लूं
आसमान में घर बसा लूं
पर जब मिला आसमान से
 ज़मीन पर आये
एक फ़रिश्ते से
नज़रिया ही बदल गया
जब उसने बताया
मोहब्बत में जीने वाले
ना ज़मीन पर चैन से
रहते हैं
ना आसमान में चैन से
जीते हैं
अब तय कर लिया
ज़मीन पर रह कर ही
मोहब्बत की तलाश
करता रहूँगा
खुदा बुला भी लेगा तो
आसमान में भी तलाश
जारी रखूंगा
जान नहीं भी रहेगी तो
जब तक वजूद रहेगा
दुनिया का
मेरी रूह भी यही करेगी
मोहब्बत मंजिल रही है
मोहब्बत ही मंजिल रहेगी
765-10-05-10-2012
मोहब्बत

मौसम से भी ज़ल्दी बदल जाते हैं कुछ लोग




मौसम से भी ज़ल्दी
बदल जाते हैं 
कुछ लोग
साथ मुस्काराते हैं
सुर मैं सुर मिलाते हैं
मतलब होता है 
 तब तक ही साथ रहते हैं 
कुछ लोग
ज़ज्बातों से खेलते हैं
वक़्त के साथ
चलते हैं कुछ लोग
दिल तोड़ने में माहिर
होते हैं कुछ लोग 
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर  
764-09-05-10-2012
मतलबी,स्वार्थ,इंसान ,फितरत,जीवन,ज़िन्दगी

बुधवार, 7 नवंबर 2012

लफ्ज़ नहीं हूँ तोड़ मरोड़ कर कभी ग़ज़ल कभी नज़्म बना लो

लफ्ज़ नहीं हूँ 
तोड़ मरोड़ कर 
कभी ग़ज़ल 
कभी नज़्म बना लो
मैं ख्याल भी नहीं हूँ 
जब भी चाहो जैसा चाहो 
मेरे बारे में वैसा सोच लो
 ख्वाब भी नहीं हूँ 
जब चाहो देख लो
 हकीकत भी नहीं हूँ  
हर बात पर हाँ भर दो 
पर जो कहता हूँ 
सुनो तो सही 
जो लिखता हूँ 
पढो तो सही 
नहीं समझ आये 
तो मानना मत 
बुरा नहीं मानूंगा 
नहीं सुनोगे नहीं पढोगे 
तो समझ लो 
हकीकत से मुंह छुपाओगे 
झूठ की दुनिया में जियोगे 
अपने फितरत से 
दुनिया को रूबरू कराओगे 
अगर तुम भी कुछ 
कहना चाहते हो 
लिखना चाहते हो तो 
अवश्य कहो अवश्य लिखो 
तुम्हारी सुनूंगा भी 
तुम्हारा लिखा पढूंगा भी 
नहीं समझ आयेगा 
तो मानूंगा नहीं 
जैसा ठीक लगेगा 
वैसा करूंगा
ये ज़रूरी नहीं है 
तुम सब की मानों 
मगर कौन 
क्या कह रहा है 
सुनो तो सही
क्या लिख रहा है 
पढो तो सही
डॉ.राजेंद्र तेला,निरंतर
763-08-05-10-2012
फितरत ,संवाद,कहना ,सुनना,सामंजस्य

मंगलवार, 6 नवंबर 2012

क्यों ख्वाब हकीकत बनते हैं


क्यों ख्वाब हकीकत बनते हैं 
क्यों ख्वाब 
हकीकत बनते हैं 
पूरा होते ही
तमन्नाओं के नए 
महल बनते हैं 
उम्मीद के
चिराग जलते हैं
ना पूरे हो तो 
जी भर के रुलाते हैं
जो हुए थे पूरे 
लोग उन्हें भी भुला
देते हैं
762-07-05-10-2012
ख्वाब 

सोमवार, 5 नवंबर 2012

तारीफ़ का जवाब तारीफ़ से देते हैं हम


तारीफ़ का जवाब
तारीफ़ से देते हैं हम
सच्ची बात
नहीं कहते हैं हम
रस्म-ओ-रिवाज़
निभाते हैं हम
बुरा नहीं मान जाए
सामने वाला
इसलिए जवाब में
तारीफ़ करते हैं हम
डरते हैं
अगर नहीं करी
तारीफ़ हमने
नहीं मिलेगी
तारीफ़ हमें भी
761-06-05-10-2012
तारीफ़

रविवार, 4 नवंबर 2012

ऐसा नहीं कि हमें उनसे मोहब्बत ना रही


ऐसा नहीं कि हमें उनसे मोहब्बत ना रही
ये बात जुदा है कि अब वो हमारी ना रहीं

ज़ज्बातों से खेलने की आदत पुरानी थी
अब उनकी हकीकत हमें पता चल गयी

गम नहीं की उनसे अब राजदारी ना रही
शायद  उनको भी हमारी ज़रुरत ना रही

जब  भी बदल जायेगी ,फितरत  उनकी
नहीं कह सकेगा कोई वो हमारी ना रही

बसा लेंगे फिर उन्हें अपनी ज़िन्दगी में
कह देंगे दुनिया को दिल से दूर नहीं रही

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
760-05-05-10-2012
शायरी,ग़ज़ल ज़ज्बात,मोहब्बत,गम,फितरत

खुशी तो खुशी होती है



गली के
आखिरी छोर में बने
लम्बे घने वृक्षों से घिरे
मेरे मकान में
पत्तों से छन कर
धूप भी टुकड़ों में आती
पर मुझे वही काफी लगती
ठीक मेरी ज़िन्दगी की
खुशियों की तरह
छोटी छोटी बातें ही
मुझे खुश कर देती
लोग कहते हैं
मैंने ज़िन्दगी में बड़ी
खुशी देखी ही नहीं
पर इस बात का मुझे
कोई रंज नहीं
सोचता हूँ
खुशी तो खुशी होती
छोटी या बड़ी से 
क्या फर्क पड़ता है
सोच उसे बड़ा छोटा
बनाता है
इंसान संतुष्ट नहीं हो तो
बड़ी खुशी भी उसे
छोटी लगती
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
756-01-03-10-2012
selected,खुशी, ज़िन्दगी, संतुष्ट, संतुष्टी, सोच, जीवन