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शनिवार, 27 अक्तूबर 2012

कोई मिला नहीं जिससे मन पूरा मिला



ना जाने कितनी ऋतुएं
बदल गयी
कोई मिला नहीं जिससे
मन पूरा मिला
बहुत ढूंढा दुनिया में
किसी में कुछ बुराई
किसी में कुछ  कमी पायी
निरंतर
दूध का धुला ढूंढता रहा
फिर भी कोई मिला नहीं
झांका जब खुद के अन्दर
खुद को भी साफ़ नहीं पाया
छोड़ दिया मन मुताबिक़
मन ढूंढना
अब जो भी मिलता
खुले दिल से
उससे ही मन मिलाता हूँ
खुद के मन की गांठें
सुलझाने की कोशिश
करता हूँ
741-37-20-09-2012
मन ,इच्छाएं,इच्छा ,जीवन,मन मिलना

क्यों लोग पल पल में अपनी फितरत बदलते



क्यों लोग पल पल में
अपनी फितरत बदलते
देख कर भी अनदेखा करते
आशंकाओं से घिरे रहते
मन में कुंठा
दिल में भ्रम पालते
क्यों इतने विचलित रहते
हंसना चाहते
पर मुस्कारा भी नहीं पाते
असहज ही जीते रहते
740-36-19-09-2012
कुंठा ,फितरत,असहज,आशंकाएं,विचलित,प्रवत्ति

रोशनी से भरे छोटे छोटे घरोंदे



ज़िन्दगी के हंसी
लम्हों की रोशनी से भरे
छोटे छोटे घरोंदे
मेरे यादों  में बसे हैं
ग़मों के बड़े बड़े मकान
मेरे दिल और ज़हन में
डेरा डाले हैं
जो मुझे सुकून से नहीं रहने देते
बार बार हैरान करते हैं
जब भी हैरानी सही नहीं जाती
मैं कमरे की खिड़की से
हरे भरे बगीचे को देखता हूँ
फूलों को निहारता हूँ
ज़िन्दगी के हसीं लम्हों को
याद करता हूँ
यादों में बसे रोशनी के घरोंदों से
रोशनी की किरणें
मेरे मन को रोशन करने लगती
मेरे बेचैनी कम होने लगती
हैरानी गुम हो जाती
मैं खुद को तरोताजा महसूस
करने लगता हूँ
फिर खुशी से काम में
लग जाता हूँ
739-35-19-09-2012
यादें,याद,लम्हे.हंसी लम्हे,ज़िन्दगी

शुक्रवार, 26 अक्तूबर 2012

जब मन नहीं लगता



जब मन नहीं लगता
कुछ भी अच्छा नहीं लगता
चाहे टी वी चलाओ
चाहे संगीत सुनो
हर पल भारी लगता
किसी से बात करने का
मन नहीं करता
ना नींद आती
ना जागने का मन करता
समय काटे नहीं कटता
आँखें बार बार
घड़ी को देखती
लगता है
सुइयां सरक नहीं रही
कब बीतेंगे ये पल
चेहरे पर मायूसी
मन में बेचैनी बढ़ने लगती
मन बार बार कहता
सब व्यर्थ है
ऐसा होता है जब मन
नहीं लगता
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर  
738-34-19-09-2012
मन,बेचैनी,जीवन,मन नहीं लगना

गुरुवार, 25 अक्तूबर 2012

बड़े बूढों ने कहा,ज्ञानियों ने समझाया



बड़े बूढों ने कहा
ज्ञानियों ने समझाया
शास्त्रों में पढ़ा
इश्वर की पूजा अर्चना
करनी चाहिए
नित्य मंदिर जाना चाहिए
पवित्र तीर्थस्थलों के दर्शन
करने चाहिए
नित्य इश्वर का नमन
करना चाहिए
एक बात और समझायी थी
कर्म,व्यवहार,आचरण भी
जैसा इश्वर को पसंद हो
वैसा ही करना चाहिए
वर्षों से विचारों का मंथन
कर रहा हूँ
फिर भी समझ नहीं पाता हूँ
क्या इश्वर की पूजा अर्चना करूँ
तीर्थ स्थलों के दर्शन करूँ
पवित्र सरोवरों में स्नान करूँ
नित्य मंदिर जा कर
इश्वर को प्रसन्न करूँ
या कर्म,व्यवहार,आचरण पर
ध्यान दूं
अब तक झंझावत में फंसा हूँ
दोनों में से एक भी
मन से नहीं कर पा रहा हूँ
पता नहीं
इश्वर को कैसा लग रहा होगा
पर इतना अवश्य जानता हूँ
इश्वर अवश्य मेरी मनोदशा को
समझ रहा होगा
मुझे विश्वास है
मुझे सज़ा तो नहीं देगा
737-33-19-09-2012
धर्म,आस्था,भगवान,इश्वर,पूजा पाठ,

चेहरे पर उम्र दिखने लगी



चेहरे पर
उम्र दिखने लगी
थकान भी बढ़ने लगी
कब पुत्र से
पिता, फिर दादा बना
पता ही नहीं चला
कुछ पल जीवन में आये भी
जब रास्ता दुर्गम लगा
सब्र और संयम से
वो भी पार किया
अब उम्र के जिस मोड़ पर
खडा हूँ
एक बड़ा प्रश्न मुंह खोले
सामने खडा है
मुझ से कह रहा है
अब ताकत कम हो गयी
उम्र बढ़ गयी
कैसे लड़ोगे कठनाइयों से
 अवाक हो जाता हूँ
घबराने लगता हूँ
कुछ पल सोचता हूँ
फिर स्वयं उत्तर देता हूँ
जीवन के पेड़ के
पत्ते अवश्य पीले हो गए
पर गिरे नहीं हैं
जब तक पेड़ में जान है
पहले जैसे ही लहराते रहेंगे
हवा के तेज़ झोंके सहते रहेंगे
पर आसानी से गिरेंगे नहीं
सब्र और हिम्मत से
लड़ते रहेंगे
736-32-19-09-2012
उम्र,जीवन,बुढापा,बुजुर्ग,

बुधवार, 24 अक्तूबर 2012

छोटी सी कामयाबी पर



हमारी
छोटी सी कामयाबी पर
इतनी पीठ थपथपाई गयी
पीठ दर्द करने लगी
कामयाबी सर पर
चढ़ गयी
अपने आप को बड़े भारी
हूनर मंद समझने लगे
थोड़ी सी कामयाबी में
मदहोश हो गए
भूल गए
आगे बढ़ने के लिए
लक्ष्य को
याद रखना होता
मेह्नत से मुंह ना
मोड़ना होता
नतीजा वही हुआ
जो होना था
होश में आये तो देखा
हम चौराहे पर खड़े थे
लोग आगे बढ़ गए
हम वहीं खड़े रह गए
735-31-19-09-12
कामयाबी,सफलता,गरूर,घमंड,प्रवत्ति ,लक्ष्य

मंगलवार, 23 अक्तूबर 2012

मैं भीड़ से अलग क्यों रहता हूँ



लोग इस बात से
नाराज़ रहते हैं
मैं भीड़ से अलग
क्यों रहता हूँ
क्यों भीड़ में शामिल
नहीं होता हूँ
कैसे उन्हें बताऊँ
कैसे उनका दिल दुखाऊँ
भीड़ में शामिल लोग ही
मुझे मजबूर करते हैं
भीड़ से अलग रहना
सिखाते हैं
19-09-2012
734-30-09-12
लोग,भीड़,जीवन

ग़मों की बारिश अगर रुकी नहीं



ग़मों की बारिश अगर
रुकी नहीं
तो यादें  ज़हन में
इस हद तक ठहर
जायेंगी
जो हो रहा आँखों के
सामने
कभी याद बन कर नहीं
आयेगा
यादें ही मौत का सबब
बन जायेंगी
19-09-2012-734-30-09-12
गम,यादें ,याद

सोमवार, 22 अक्तूबर 2012

लोग आते हैं,लोग जाते हैं



ज़िन्दगी में
लोग आते हैं
लोग जाते हैं
कुछ याद आते हैं
कुछ याद नहीं रहते हैं
कुछ याद करते हैं
कुछ भूल जाते हैं
तुम्हें दुःख होता है
लोग 
तुम्हें क्यों भूल गए
केवल इसलिए
तुम भूल जाओ तो
गुनाहगार नहीं
दुसरे भूल जाएँ तो
गुनाहगार
जब हिसाब बराबर
हो गया
तो फिर क्यों रोते हो

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
14-09-2012--733-29-09-12
यादें, जीवन

मेरी यादों को मिटाने की कोशिश में



यादों को
मिटाने की कोशिश में
वो खतों को फाड़ रहे हैं
तस्वीरों को जला रहे हैं
घर के कोने कोने से
मुझसे जुडी हर चीज़ का
नाम-ओ-निशाँ मिटा रहे हैं
चाहे कितनी भी नफरत
कर लें मुझसे
साथ बिताए लम्हों को
कैसे मिटायेंगे
दिल में ज़ज्ब सूरत को
कैसे हटायेंगे
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
14-09-2012
732-28-09-12
यादें,मोहब्बत,नाम-ओ-निशाँ ,नफरत

रविवार, 21 अक्तूबर 2012

चाहूँ तो भी



चाहूँ तो भी
उनके सिवाय किसी को
याद करने का मन नहीं करता
क्या था उनमें जो
सब को मुझ से दूर रखता
न तो अब तक पता चला
न ही उन्होंने
जुदा होने से पहले बताया
शायद मजबूरियों ने
उन्हें मेरे साथ ना
रहने दिया
ना ही कहने दिया
वो भी  इस हद तक
मुझे चाहती थी
उनके सिवाय कोई
और मेरी यादों में
नहीं आये

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
13-09-2012
731-27-09-12
याद,मोहब्बत,चाहत

कभी कोई बुलाने पर भी नहीं आता



कैसी विडंबना है
कभी कोई बुलाने पर भी
नहीं आता
कभी बिना बुलाये भी
घर लोगों से भर जाता 
जब मन की संतुष्टी के लिए
एक साथ ही बहुत होता
वो भीड़ में भी नहीं मिलता
इंसान
खुद को अकेला समझता
निरंतर
मन के अनुरूप साथ की
तलाश में भटकता रहता
सदा असंतुष्ट रहता

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
13-09-2012
730-26-09-12
साथ,अकेलापन,मन