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शनिवार, 25 अगस्त 2012

कोई सो गया बात करते करते



कोई सो गया
बात करते करते
जगा गया 
रात भर के लिए
ज़िन्दगी भर के लिए
जगा दी
तमन्नाएं हमारी
खौफज़दा हूँ
क्या उन्हें याद रहेगा
उनका वादा
सवेरे उठते उठते
या मिलेगी फिर
नाकामयाबी की
सौगात रोते रोते
ज़िंदगी गुजरती रहेगी
अधूरी हसरतों में 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
मोहब्बत.चाहत,शायरी,selected
17-07-2012
613-10-07-12

अफ़साने


जब भी रात में
तुझ को
याद करता हूँ 
तेरी बेवफाई के
के अफ़साने
ज़हन में आ जाते हैं
दिल में इक 
टीस उठती है
क्यूं भूलता नहीं ये
अफ़साने
कब तक रुलाते रहेंगे  
ये खौफ से भरे
अफ़साने
हर रात को जगायेंगे
ये अफ़साने


डा.राजेंद्र तेला,निरंतर  
17-07-2012
612-09-07-12

शुक्रवार, 24 अगस्त 2012

हम सो कर भी सोये नहीं



हम सो कर भी
सोये नहीं
ख्वाबों में उन्हें 
देखते रहे
वो थे की बिना
बुलाये ही आ गए
पूछा तो मुस्काराकर
कहने लगे
जाना था कहीं ओर
तुम्हारी ओर आ गए
जब आ ही गए तो
हमें ही देखते रहो
चले जायेंगे तो भी
बेचैनी में सो तो ना
पाओगे
हमें देखते देखते ही
रात गुजार लो
रात भर जागने का
बहाना तो ढूंढ लोगे
हमें बिन बुलाया 
मेहमान तो नहीं कहोगे
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
                     17-07-2012
                       611-08-07-12

अब अपने आप से नफरत करने लगा हूँ


कभी कभी खुद से भी
नफरत होने लगती है
जो नहीं कहना चाहिए
कह देता हूँ
जो नहीं सुनना चाहिए
सुन लेता हूँ
दिल के हाथो कमज़ोर
हो जाता हूँ
खुद को बेबस पाता हूँ
सिला उम्मीद से
उलटा पाता हूँ
लोगों की नज़रों से
उतर जाता हूँ
अब सोच रहा हूँ
दिल की सुनना छोड़ दूं
दिमाग से काम लूं
चेहरे पर चेहरा चढ़ा लूं
हर बात को तोल कर बोलूँ
लोगों को खुश कर दूं
 झूठा सुकून दे दूं
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
17-07-2012
610-07-07-12

गुरुवार, 23 अगस्त 2012

अच्छा हो अब ज़ख्म ना भरे कोई



अच्छा हो अब
ज़ख्म ना भरे कोई
गुजार लिए दिन
दर्द सहते सहते कई
आदत सी पड गयी
क्यूं शौक लगाऊँ
अब नया कोई
लगा भी देगा
अगर मरहम कोई
कैसे यकीन करूँ
नया दर्द नहीं देगा
फिर कोई
इस हाल में ही खुश हूँ
बस मुस्करा देख ले
अब कोई
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर   
शायरी,दर्द 
17-07-2012
609-06-07-12

मंजिल अभी दूर है पड़ाव नहीं डालना



मंजिल  अभी दूर है पड़ाव नहीं डालना
=============
जीत को
जीत नहीं मानना
ख्यालों को
मिला है मुकाम
इतना सा समझना
मंजिल  अभी दूर है
पड़ाव नहीं डालना
आ जाए
सफ़र में रुकावट  
हार नहीं मानना
हिम्मत होंसले से
निरंतर चलते रहना
बस इतना सा
जानना
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
17-07-2012
608-05-07-12

यूँ चेहरे को हाथों से ना छुपाओ



यूँ चेहरे को
हाथों से ना छुपाओ
चाहने वालों का
दिल ना दह्लाओ
बस इतना सा बता दो
क्या शरमा रहे हो ?
या ज़माने की नज़रों से
बच रहे हो
हम खैर ख्वाह तुम्हारे
करते हैं दुआ खुदा से
तुम्हें नज़र ना लग जाए
कम से कम हमें तो 
चेहरा दिखाओ
यूँ चेहरे को हाथों से
ना छुपाओ
17-07-2012
607-04-07-12

बुधवार, 22 अगस्त 2012

बौने हैं हम


बौने हैं हम
======
बौने हैं हम
भाग्य के मारे हैं हम
पूरे हो कर भी
अधूरे हैं हम
बेगुनाह हो कर भी 
गुनाहगार कहलाते हैं हम 
बचपन से बुढापे तक
हमारी भावनाओं को 
कोई नहीं समझता
ज़िन्दगी से लेकर
सर्कस तक हँसी के
पात्र हैं हम
तिरिस्कार सहते हैं हम
मन ही मन घुटते हैं हम
बच्चों से बूढों तक
सब को हँसाते हैं हम
जीना है इसलिए
दिखते नहीं
आंसू किसी को हमारे
खून के आंसू पीते हैं हम
चुपचाप सहते हैं हम
निरंतर
इश्वर से प्रार्थना हमारी
किसी को ना दे ऐसा
नसीब
खुद रोते हैं दूसरों को
हँसाने के लिए हम
बौने हैं हम

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
17-07-2012
606-03-07-12

शुक्रिया अदा करता रहा



चेहरे पर उदासी का
मुलम्मा चढ़ाए
चलते चलते
अरसा हो गया था
हँसना ही भूल गया था
रास्ते में
ह्रदय को भाये
ऐसा साथी मिल गया
डूबते को सहारा
नाउम्मीद को
उम्मीद का साथ
मिल गया
हँसना भी याद आ गया
कुछ पल भी नहीं गुजरे
किस्मत ने चौराहे
पर ला खडा किया
रुका नहीं
निरंतर चलता रहा
हँसना भी भूला नहीं
कुछ पल के साथी को
साथ निभाने का
हँसना याद दिलाने का
शुक्रिया
अदा करता रहा   
05-07-2012
605-02-07-12

खामोश रहो



खामोश रहो
कुछ मत बोलो
अपने गम अपने तक
रख लो
ना विरोध करो ना
प्रतिरोध करो
कोई कुछ कहे
चुपचाप सुन लो
ना व्यथित हो
ना आंसू बहाओ
पहले भी
तुमने विरोध किया
क्या नतीजा निकला ?
क्या सिला मिला ? 
बचा खुचा विश्वास खोया
खुद को चौराहे पर
खडा पाया
किधर जाना है?
पता नहीं था
क्यों भूल गए?
बहुत मुश्किल से खुद को
सम्हाला था
क्या बार बार ऐसा ही
चाहते हो
कब तक लड़ोगे
लोगों को बदलने की
कोशिश करोगे
बार बार हारोगे
खुद के अस्तित्व को
खतरे में डालोगे
क्यों ना समर्पण कर दो?
सबकी इच्छा का पालन
कर लो
 नाराजगी दूर कर दो
प्रभु में विश्वास रखते हो
तो उस पर छोड़ दो
वो जैसा चाहता है
वैसा ही होगा
लड़ोगे तो भी
नहीं लड़ोगे तो भी
तुम कर्म करते रहो
ईमान से जीते रहो
सब्र से सहते रहो
अब समय आ गया है
भाग्य पर छोड़ दो
जो भाग्य में लिखा है
हो जाएगा
नहीं चाहोगे तो भी
चाहोगे तो भी
05-07-2012
604-01-07-12

मंगलवार, 21 अगस्त 2012

किसी ने कहा अन्धेरा हो गया



किसी ने कहा
अन्धेरा हो गया
मैंने कहा
अँधेरा नहीं हुआ
उजाला चला गया
कोई बोला सर्दी आ गयी
मैं बोला गर्मी चली गयी
फिर किसी ने कहा
इश्वर होता है
मैंने पूछा
क्या तुम ने देखा है
उत्तर मिला
मुझे इश्वर में आस्था है
मैंने कहा
जैसा मानोगे ,
जैसा सोचोगे
वैसा ही देखोगे
क्यों नहीं
घ्रणा में प्यार देखो
इर्ष्या में
सदभावना देखो
इर्ष्या करोगे इर्ष्या
पाओगे,
घ्रणा करोगे घ्रणा
पाओगे
विश्वास करोगे विश्वास
पाओगे
अच्छा सोचोगे अच्छा
करोगे
खुशी से जीवन
जियोगे
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
26-06-2012
600-50-06-12

सोमवार, 20 अगस्त 2012

मेरी आत्मा

पता नहीं शरीर में 
कितनी पडतों के
नीचे दबी है 
कहाँ छुपी है
मेरी आत्मा
इतना अवश्य पता है
निरंतर कुलबुलाती है
जब देखती है
बच्चों,स्त्रियों.बढे,बूढों
निरीह जानवरों पर
अत्याचार
रोती है जब देखती है
दोगलापन,असत्य
अहम्,अहंकार से
भरे लोगों को
कुछ कर तो नहीं पाती
पर चित्कार अवश्य
करती है
बार बार चिल्लाती है
तुम कभी ऐसा मत करना
जिस दिन
तुमने ऐसा सोचा भी
मैं तुम्हें
छोड़ कर चली जाऊंगी
फिर तुम्हें भी अमानुष
बन कर जीना पडेगा
जीवन में
कभी चैन नहीं मिलेगा
संसार से
बेचैन ही जाना पडेगा
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
चैन,आत्मा,अत्याचार,जीवन जीवन मन्त्र
                       26-06-2012
                          598-48-06-12


रविवार, 19 अगस्त 2012

अब तक पता नहीं था



अब तक 

पता नहीं था
चुप रहना
जुबां को आराम देना
कितना अच्छा होता है
अब चुप रहता हूँ
खुशी से जीता हूँ
ना कोई नाराज़ होता है
ना जवाब में
अपशब्द कहता है
ना रिश्तों में दरार आती
ना मनों में फर्क आता है
जब भी मिलता है
गले लग कर मिलता है
हर शख्श मुझे
अब दोस्त समझता है
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
25-06-2012
598-48-06-12

क्यों कहते,तुम अकेले हो

क्यों कहते हो
तुम अकेले हो
किसी के साथ
कोई नहीं होता
तुम कहते हो
तुम अकेले हो
हर तरह के इंसान
मिलते जीवन में
जो हँसाते भी हैं
रुलाते भी हैं
दर्द कम भी करते हैं
बढाते भी हैं
ये तुम पर निर्भर है
तुम किस की बातों से
प्रभावित होते हो
किन बातों को
हृदय से लगाते हो
साथ ढूँढने से पहले
स्वयं को सुद्रढ बनाओ
स्वयं पर विश्वास रखो
कोई मिले ना मिले
स्वयं को
अकेला नहीं पाओगे
स्वयं रास्ता बनाओगे
न विफलता का मुंह देखोगे
ना कभी किसी से कहोगे
तुम अकेले हो
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
25-06-2012
597-47-06-१२

ख्यालों की दुनिया में



सोना चाहता था
सुन्दर सपने देखना
चाहता था
उनके पैगाम की उम्मीद में
जागना भी चाहता था
रात बीत गयी
ना उनका पैगाम आया
ना सुन्दर सपने
देख सका
रोज़ की तरह उम्मीद में
वक़्त काटता रहा
ख्यालों की दुनिया में
खोता रहा
25-06-2012
596-46-06-12