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शनिवार, 12 मई 2012

चेहरे

मैंने देखे हैं 
भांती भांती के चेहरे
कुछ अपने में डूबे
दुनिया से बेखबर
फूल से कोमल
कुछ चिंता से ग्रस्त
दुखों के
पहाड़ तले दबे हुए
कुछ ऐसे भी दिखे
जो स्वयं से अधिक
दूसरों के
कार्य कलापों में व्यस्त
चंद चेहरे ऐसे भी दिखे
जो हँस रहे थे
पर हंसी के पीछे मन की
पीड़ा झलक रही थी
कुछ महक रहे थे
सबको लुभा रहे थे
खुशियाँ बाँट रहे थे 
कुछ ज़हर से बुझे हुए
बिल्ली सी आँखें
लोमड़ी सा मष्तिष्क लिए
अपना शिकार दूंढ़ रहे थे
कुछ साधारण से चेहरे
ऐसे भी दिखे जो संतोष से
लबालब भरे हुए थे
तनाव का
नामो निशाँ भी नहीं था
जिज्ञासा से भरे चेहरे भी
दिखे मुझको
हर घटना को आँखें
फाड़ फाड़ कर देख रहे थे 
कुछ थके हुए झुर्रियां से
भरे हुए
मन में  प्रश्न लिए हुए
क्या होगा ?कब होगा
जीवन कब तक चलेगा
इस बात से डरे हुए
कुछ जोश से भरे हुए
आगे बढ़ने की चाहत में
कर्म में जुटे हुए
कुछ अलसाए से आराम से
चाय के ढाबे पर बैठे
बीड़ियाँ फूँक रहे थे
और भी ना जाने
कितनी तरह के चेहरे देखे
जो उनके
जीने सोचने का ढंग
स्पष्ट उजागर कर रहे थे 
जितने भी चेहरे याद रहे
खुल कर बता दिया 
जो भूल गया फिर कभी
बता दूंगा
पर अब जो भी चेहरा
दिखता
उसमें कुछ ना कुछ
ढूंढता हूँ  
15-03-2012
379-113-03-12

कम से कम सुन तो लो


जो कह रहा हूँ
कम से कम सुन तो लो
बोलने से पहले ही
बिना समझे ही
उत्तर तो मत दो
सब जानते हो
मन में धारणा मत रखो
बिना सोचे समझे
प्रतिक्रया मत दो
एक बार यह भी सोच लो
कोई करे अगर
तुम्हारे साथ ऐसा ही
तुम्हें कैसा लगेगा?
उसका व्यवहार
क्या तुम्हें स्वीकार होगा?
फिर क्यों नहीं सुनते हो
मेरी बात पूरी
नहीं समझ आये तो
मानना ज़रूरी तो नहीं
कम से कम सुन तो लो
बात मेरी
15-03-2012

मुझे गलतफहमियों से बचाओ


इससे पहले की तुम
सफलता की सीढ़ियों पर
चढ़ जाओ
शिखर पर पहुँच कर
मुझे पहचानो भी नहीं
मेरा मन को व्यथित करो
तुम्हारे बारे में
मेरी धारणा बदल जाए
स्थिती
को समझ ना पाऊँ
तुम्हें
अहंकारी समझने लगूं
क्यों ना
तुम मुझे भूल जाओ
बाद में अधिक सहना
पडेगा
अभी थोड़े में काम
चलाओ
समय रहते मुझे
गलतफहमियों से
बचाओ
15-03-2012
375-109-03-12

शुक्रवार, 11 मई 2012

मैं चुप हूँ अगर .......


चुप हूँ अगर
तो ये ना समझना
तुम्हें भूल गया हूँ
दिल अब भी तुम्हारे
लिए रोता है
हर लम्हा तुम्हें याद
करता है
ये बात जुदा है
चाहता नहीं हूँ
मुझे गम में डूबा
देख कर
तुम भी ग़मों में डूब
जाओ
अपनी बसी हुयी
दुनिया को उजाड़ दो
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
15-03-2012
374-108-03-12

ये कैसा साथ निभाते हो तुम


बार बार हमारे
करीब आते हो तुम
हर बार मिल कर
बिछड़ जाते हो तुम
ना तुम हमें जानते
ना हम तुम्हें जानते
फिर भी बार बार
क्यों मिलते हैं हम
खुद भी सज़ा पाते हो
हमें भी
सजा देते हो तुम
ये कैसा साथ
निभाते हो तुम
15-03-2012
373-107-03-12

कैसे सम्हालेंगे हम उनको


वक़्त की बात है
लोग उनके
दीदार को तरसते हैं
जो कभी हमारे
दीदार को तरसते थे
वो सामने खड़े होते हैं
तो भी नहीं
पहचानते हमें
गम इस बात का नहीं
वो हमें भूल गए हैं
हम परेशान हैं
सिर्फ ये सोच कर
जब भी वक़्त पलटेगा
कोई पहचानेगा
नहीं उन्हें
कैसे बर्दाश्त करेंगे वो
 कैसे सम्हालेंगे हम
उनको
14-03-2012
372-106-03-12

वो हमसे मिलें नहीं ,तो कोई बात नहीं


वो हमसे मिलें नहीं
तो कोई बात नहीं
हमें नींद नहीं आये
तो कोई बात नहीं
रातों को जागना पड़े
तो कोई बात नहीं
वक़्त बेचैनी में कटे
तो भी कोई बात नहीं
फ़िक्र सिर्फ इस बात की
कहीं भूल ना जाए
याद ही ना करें
हमें कभी भी
14-03-2012
371-105-03-12

जीवन तलाशता है खुद को


जीवन
तलाशता है खुद को
दिखता है
जैसा देखो उस को
नहीं पहचान पाया
कोई थाह उसकी
नहीं जान पाया
कोई आज तक उसको
जीवन तो जीवन है
जिसने
जैसा भी भुगता
वैसा ही समझा उस को

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
 
14-03-2012
370-104-03-12

गुरुवार, 10 मई 2012

कब तक गुजरेगी ज़िन्दगी इम्तहानों में


कब तक गुजरेगी
ज़िन्दगी इम्तहानों  में
कदम कदम पर
लड़ना पडेगा तूफानों से
एक गुजरता नहीं
दूसरा मुंह दिखाने लगता
ज़ख्म ठीक होने से पहले ही
फिर ज़ख्म खाता
बताया नहीं था किसी ने
यही होता ज़िन्दगी में
चैन की तलाश में
बेचैनी का साथ मिलता
देना पड़ता इम्तहान
पल पल में
कब तक गुजरेगी
ज़िन्दगी इम्तहानों  में
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर...
14-03-2012
368-102-03-12
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर...