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शनिवार, 21 अप्रैल 2012

इधर रणभेरी बजी,उधर तलवारें चमकी


इधर रणभेरी बजी
उधर तलवारें चमकी
धरती माँ की रक्षा में
हर वीर की बाहें 
फडकी    
वीरांगनाओं ने कमर 
कसी
चेहरे पर भय का 
भाव नहीं
कर्तव्य की बली वेदी पर
चढ़ने को
हर जान तैयार खडी
क्या बच्चा क्या बूढा
क्या माता क्या अबला
हर मन में देशभक्ती की
आग जली
दुश्मन को धूल चटाने को
सेनायें तैयार खडी
राजपुरोहित ने किया
तिलक 
महाराणा प्रताप के  
ललाट पे
फिर जोश से बोले
एकलिंगजी का नाम ले
युद्ध में प्रस्थान करो
दुश्मन को
सीमा से बाहर करो
विजय अवश्य तुम्हें
ही मिलेगी
बस हिम्मत होंसला
बनाए रखो
धरती माँ की रक्षा में
जान भी न्योछावर
करनी पड़े
तो चिंता मत  करो
सुन रहा था चेतक
सारी बातें ध्यान से
उसने भी हिलायी गर्दन
बड़े गर्व और विश्वास से
प्रताप ने खींची रासें
लगायी ऐड चेतक के
जन्म भूमी मेवाड़ की
रक्षा के खातिर
बढ चले सीधे युद्ध के
मैदान को
08-03-2012
321-55-03-12

हास्य कविता-नदी किनारे खडी थी लडकी


नदी किनारे 
खडी थी लडकी 
लड़के की नज़र 
उसपर अटकी
पास जा कर बोला,
आई लव यू
लडकी बोली,
आई हेट यू
लड़का बोला 
आई ऍम सीरियस 
लडकी बोली 
बट यू आर इडीयट 
लड़का बोला 
अब तो मान लो
लडकी बोली 
अब तुम भाग लो
लड़का बोला
ऐसी क्या नाराजगी 
लडकी बोली 
पीछे अम्माजी खडी 
लड़के ने पीछे देखा
अम्माजी ने गला पकड़ा
लड़का बोला 
अम्माजी मुझे 
माफ़ कर दो
अम्माजी बोली माफ़ 
बाद में करूंगी
राखी लायी हूँ
पहले बंधवा लो
बहन को पांच सौ का 
नोट थमा दो
फिर फ़ौरन सटक लो
दोबारा दिख गए तो 
पहले पिटोगे 
फिर हज़ार का 
नोट दोगे
08-03-2012
320-54-03-12

शुक्रवार, 20 अप्रैल 2012

ना जाने कब तक सिलसिला यूँ ही चलता रहेगा


जब भी हम उनसे
उनका फैसला पूंछते हैं 
वो हौले से मुस्कारा
देते हैं
हमारी इल्तजा को
हवा में उड़ा देते हैं
जवाब में हम भी
खिसिया कर मुस्कारा
देते हैं
ना जाने कब तक सिलसिला
यूँ ही चलता रहेगा
उनका फैसला-ऐ-दिल
हमें मालूम चलेगा
तब तक तो हमें
उम्मीद में जीना ही
पडेगा
उनके नाज़ नखरों को
यूँ ही उठाना पडेगा
07-03-2012
319-53-03-12

बिना मांगे सलाह ना दिया करो


बिना मांगे
सलाह ना दिया करो
सदा खामियां भी
ना निकाला करो
बस इतना सा कह दो
आवश्यकता हो तो
मुझे याद करना
काम कैसे करना
यह भी ना बताया करो
बताना ही है तो
क्या करना चाहिए
बताया करो
इतना सा खुद भी
याद रखा करो
संसार में कोई भी नहीं
जानता सब कुछ
जो तुम नहीं जानते
हो सकता 
दूसरा जानता हो
तुमसे बेहतर
07-03-2012
318-52-03-12

गुरुवार, 19 अप्रैल 2012

हास्य कविता-छोडो जाने दो,माफ़ करो


हँसमुखजी की
 पत्नी के मुंह पर
मधु मक्खी ने काट लिया
पत्नी दर्द से
बिलबिलाने लगी
डाक्टर को दिखाने के
 लिए कहने लगी
हँसमुखजी बोले
छोडो जाने दो माफ़ करो 
 कुछ दिन में ठीक हो
जाओगी
पत्नी का मुंह सूज कर 
कुप्पा हो गया
लडकी को पड़ोसी के
लड़के ने छेड़ दिया
लडकी ने शिकायत करी
हँसमुखजी बोले पड़ोसी है
छोडो जाने दो माफ़ करो
लडकी कई दिन तक
भुनभुनाती रही
लड़के को मोहल्ले में
वर्माजी के कुत्ते ने काट लिया
लड़का दर्द से चिल्लाया
वर्माजी से लड़ने के लिए
जाने लगा
हँसमुखजी बोले वर्माजी
भोले इंसान हैं
उनकी क्या गलती
छोडो जाने दो माफ़ करो
लड़का
महीनो लंगडाता रहा
होली के हुडदंग में
यार दोस्तों ने
हँसमुखजी के मुंह पर
कीचड लगा दिया
हँसमुखजी क्रोध से
आगबबूला हो गए
घर पहुँचते ही
पत्नी बच्चों के सामने
दोस्तों को कोसने लगे
सब एक साथ बोले
यार दोस्त ही तो हैं
छोडो जाने दो माफ़ करो
उसके बाद हँसमुखजी
छोडो जाने दो माफ़ करो
कभी नहीं बोले
07-03-2012
317-51-03-12

बुधवार, 18 अप्रैल 2012

मन नहीं लगेगा मेरे कमरे की दीवारों का

मन नहीं लगेगा
मेरे कमरे की दीवारों का
मेरे दुनिया से जाने के बाद 
निरंतर मुझे याद करेगी
जब उन्हें रहना पडेगा 
तन्हायी में
कुछ कह तो नहीं पाएंगी
मगर मुझे याद कर के
कुछ सोचेंगी अवश्य 
आंसू तो नहीं बहायेंगी
मगर घर में 
सूनापन तो लायेंगी
दीवारों के रंग
हलके लगने लगेंगे
खामोशी काटने को दौड़ेगी
जब भी मेरी कुर्सी पर 
कोई बैठेगा
मेरी कलम से कुछ
लिखने की कोशिश करेगा
पसंद नहीं करेंगी
मेरे कमरे की दीवारें
मेरे जाने के बाद
अगर खेला किसी ने
मेरे ज़ज्बातों से
मेरे दुनिया से जाने के बाद 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

07-03-2012

316-50-03-12

मंगलवार, 17 अप्रैल 2012

पहली बार जब चढ़ा था पर्वत पर कोई


 पहली बार
जब चढ़ा था
पर्वत पर कोई
हाथ उसके खाली थे
ना कोई औजार
ना कोई सहारा
ना हथियार
ना पैरों में जूते थे 
लगन होंसला
हिम्मत उसके साथ थे
आँखों में था सपना
पर्वत पर विजय पाने का
इन्ही के सहारे जीता था
उसने पर्वत को
 तुम क्यों घबराते हो
याद करो 
उस महान इंसान को 
उसकी हिम्मत
होंसले,लगन से
प्रेरित हो कर
तुम भी जुट जाओ
आगे बढ़ जाओ
स्वयं पर विश्वास रखो
 एक दिन
सफल हो जाओगे
लक्ष्य तक पहुँच जाओगे 


© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
 
07-03-2012
315-49-03-12

भला किसी का अगर करते हो


 भला किसी का 
अगर करते हो
तो ये ना समझना
 बहुत बड़ा काम
करते हो
भला किसी का
करो तो
खुद का भी भला 
होता है
इश्वर प्रसन्न
ह्रदय संतुष्ट
मन तृप्त होता है
दूसरे को लाभ कम
खुद को लाभ 
अधिक होता है
07-03-2012
314-48-03-12

हास्य कविता-हँसमुखजी मुझ से कहने लगे बहुत मुश्किल में फंस गया हूँ


हँसमुखजी मुझ से कहने लगे
बहुत मुश्किल में फंस गया हूँ
मुझ पर
प्यार का रंग चढ़ गया है
मैंने कहा
रंग को जितना चढाओगे
उतना ही चढ़ता जाएगा
जितना पकाओगे
उतना ही पक्का हो जाएगा
भूत बन कर सर पर सवार
हो जाएगा
दिन रात तुम्हारा हाल
बेहाल करेगा
ना सोने देगा ना जागने देगा
लडकी के पहलवान भाई को
पता चलेगा तो पिटना भी पडेगा
तुरंत प्यार के रंग को उतार दो
अपने पिताजी को बता दो
ज़ल्दी से तुम्हारा विवाह
करवा दे
ज़िन्दगी भर के लिए गले में
फंदा बंधवा दे
बीबीका रंग  चढ़ने के बाद
कोई रंग नहीं चढ़ेगा
कोशिश करोगे तो फिर निरंतर
बीबी से भी पिटना पडेगा
07-03-2012
312-46-03-12

सोमवार, 16 अप्रैल 2012

उसने दुपट्टे को मुंह से क्या हटाया



उसने दुपट्टे को
मुंह से क्या हटाया
लगा चांदनी मेरे
दिल आँगन में
उतर आयी
अपनी ठंडक से
ठंडक देने के बजाए
हसरतों की आग
जला दी
अब कब बुझेगी
इस इंतज़ार में
रहता हूँ
दुपट्टे से ढके
हर चेहरे से
दुपट्टा हटने का
इंतज़ार करता हूँ
07-03-2012
311-45-03-12

बड़ी मुश्किल से भूला हूँ


मत सुनाओ मुझे
अपने दिल के अफ़साने
बड़ी मुश्किल से भूला हूँ
अब याद ना दिलाओ
मुझे मेरे अफ़साने
तुम्हारे साथ भी वही
हुआ होगा
जो मेरे साथ हुआ था
तुम्हें भी किसी के हुस्न ने
लूटा होगा
फिर बेवफायी का तोहफा
दिया होगा
ज़ख्मों से नवाज़ा होगा
फिर तुम्हें ही कसूरवार
ठहराया होगा
जी भर के तडपाया होगा
लम्हा लम्हा रुलाया होगा
अब तुम भी भूल जाओ
मोहब्बत के जंजाल से
निकल जाओ
07-03-2012
310-44-03-12