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शनिवार, 7 अप्रैल 2012

खुशी से जीने के लिए


मुझे अपना
रोता हुआ चेहरा मत
दिखाओ
शीशे में खुद को कई बार
रोते हुए देख चुका हूँ
मुझे अपनी व्यथा मत
बताओ
मैं अपनी व्यथा
दुनिया को कई बार बता
चुका हूँ
अपनी समस्याओं का
बखान मतों करो
मैं कई बार अपनी
समस्याओं की चर्चा
कई लोगों से कर चुका हूँ
दिखाना ही है तो अपना
हँसता हुआ चेहरा दिखाओ
समस्याओं का समाधान
बताओ
व्यथा कम करने के उपाय
सुझाओ
नहीं चाहता जो मैं 
करता रहा
वो तुम भी करो
मुझे कोई लाभ नहीं हुआ
तुम्हें कैसे होगा
आओ अब मिल कर हँसें
समस्याओं से बचने पर
चर्चा करें 
खुशी से जीने के लिए
मंथन करें
दूसरों को भी खुश 
रहना सिखाएँ
04-03-2012
293-28-03-12

शुक्रवार, 6 अप्रैल 2012

संगत में कुछ तो सीख जाऊंगा


खुश हूँ कोई तो
जानने लगा है मुझको
ठीक से 
हचानने लगा है मुझको
जो भी कहता हूँ
ध्यान से सुनता है
चुप रहकर सर हिलाता है
हाँ में हाँ मिलाता है
शायद वो भी वही
सह रहा है
जो मैं सह रहा हूँ
वही भुगत रहा है
जो में भुगत रहा हूँ
वो चुप रहना सीख गया
मैं अब भी
एक ही गीत गाता हूँ
अपने दुखो का रोना रोता हूँ
उनका बाज़ार लगाता हूँ
जानता हूँ
कोई खरीददार नहीं
मिलेगा
खुद का युद्ध
खुद को ही लड़ना पड़ता  
खुद को ही चुप रह कर
सहना  सीखना होगा
वो सहना सीख गया
मुझे सीखना बाकी है
इसी आशा मैं
उससे निरंतर मिलता हूँ
संगत में कुछ तो सीख
जाऊंगा
मन की कुंठाओं पर
एक दिन विजय
पा लूंगा
04-03-2012
291-26-03-12

आपकी खामोशी हमें कैसे भायेगी ?


बिना पानी के नदी
बिना कूक के कोयल
किस को अच्छी लगती ?
आपकी खामोशी
हमें कैसे भायेगी ?
दिल को
व्यथित करती
इक शूल सी चुभती
हर पल
मन प्रार्थना करता
परमात्मा
आपको खुशियों से
भर दे
फिर से आपके चेहरे पर
मुस्काराहट ला दे
आपका नूर आपको
लौटा दे
04-03-2012
289-24-03-12

गुरुवार, 5 अप्रैल 2012

अब बचा नहीं कुछ बताने को


लुटा चुका सब
कुछ बचा नहीं
अब लुटाने को
इतना कुछ देख लिया
बचा नहीं अब
कुछ और देखने को
इतना रो लिया अब तक
मन नहीं करता
अब हँसने का
जी रहा हूँ किस तरह
अब बचा नहीं कुछ
बताने को
सुकून क्या होता है
भूल गया हूँ
समझता हूँ  सुकून
अब चुप रहने को
03-03-2012
287-22-03-12

बुधवार, 4 अप्रैल 2012

ऊपर वाले की कृपा है,सब कुछ ठीक ठाक है



घर टूट चुके हैं
रिश्ते तार तार
हो चुके हैं
बची है रस्म
साथ रहने की
साथ दिखने की
साथ हँसने की
एक दूजे के कष्ट में
झूठे आँसू बहाने की
मन में खार
मगर मजबूरी
प्यार जताने की
धोखा देने की
धोखा खाने की
सब जानते
फिर भी कहानी सब
एक ही दोहराते
चेहरे पर चेहरा चढाते
झूठ को सच बताते
बड़ी शान से
मुस्कराते हुए कहते हैं
ऊपर वाले की कृपा है
सब कुछ ठीक ठाक है
03-03-2012
286-21-03-12

मेरा दुश्मन मैं खुद हूँ

मेरा दुश्मन मैं खुद हूँ
आदत से मजबूर हूँ
सच कह देता हूँ
उनकी नाराजगी का
बहाना बन जाता हूँ
उन्हें खो देता हूँ
बहुत कोशिश कर ली
आदत नहीं बदल 
पाता हूँ
खुदा का फरमान 
समझ
फैसला कबूल करता हूँ
नया साथ ढूँढने
निकल पड़ता हूँ
03-03-2012
285-20-03-12

मंगलवार, 3 अप्रैल 2012

सत्य -असत्य


तुम मुझसे
सत्य सुनना चाहते
मेरा सत्य जानना चाहते
पर अपना सत्य
बताना नहीं चाहते
असत्य के आवरण में
अपना सत्य छुपाना चाहते
सत्य की अपेक्षा करना
अगर आवश्यक है
तो तुम्ही बताओ
सामने वाला भी अगर
सत्य की अपेक्षा रखता है
तो गलत कहाँ करता है?
फिर सत्य जानने के लिए
हम क्यों
इतना लालायित रहते ?
तुम कहोगे
मानव स्वभाव है
तो फिर मानव स्वभाव तो
असत्य को सहना भी नहीं है
चाँद को
सूरज तो नहीं कह सकते
मेरे पास तो
उत्तर का अभाव है
तुम्हारे पास
उत्तर का समाधान हो तो
मुझे ही नहीं
सारे जग को बताओ
नहीं तो सत्य की अपेक्षा
करना छोड़ दो
वह भी नहीं हो पाए तो
असत्य को सुनते रहो 
असत्य बोलते रहो 
परमात्मा को पाना है तो
सत्य कहने का
प्रयत्न करना प्रारम्भ करो
इस व्याधि से मुक्ती
मिल जायेगी 
परमात्मा की इच्छा
अनुरूप जी सकोगे
अभी जो भी हम कर रहे हैं
वो हमें परमात्मा से
दूर कर रहा है
03-03-2012
283-18-03-12

बेफिक्र


चाहो तो
निकाल कर देख लो
मेरे दिल को
ज़ख्म खाते खाते
जगह जगह से
कट पिट गया है
ये ऊपर वाले की
मर्जी है
अब भी धड़क
रहा है
बेफिक्र मुस्करा
रहा है
02-03-2012
278-13-03-12

सोमवार, 2 अप्रैल 2012

उसकी रज़ा को सर झुका कर कबूल कर लूं


लौट कर आता नहीं
वक़्त जो बीत  गया
क्यूं दुखाऊँ
दिल को याद कर के
उस मंजर को जो
गुजर गया
ना जाने कितने गम
बचे हैं
ज़िन्दगी में सहने
के लिए
कितना भी बचना चाहूँ
बच ना सकूंगा
अभी बहुत है
खुदा की झोली में
मुझे देने के लिए
क्यूं ना उनके लिए
तैयार रहूँ
खुदा के फैसले का
खामोशी से इंतज़ार करूँ
उसकी रज़ा को
सर झुका कर कबूल
कर लूं
02-03-2012
277-12-03-12

जिसने खुद को जान लिया


जिसने खुद को जान लिया
इंसानियत को पहचान लिया
खुदा की रज़ा को 
ज़िन्दगी में उतार लिया
समझो खुदा के घर का
रास्ता जान गया 
खुदा का नूर उस पर बरसेगा
हर शख्श अपना लगेगा
दिल में नफरत
रंजिश का नाम ना होगा
ज़िन्दगी में सुकून का
राज होगा
ज़मीन से उठने के बाद
खुदा का घर उसकी मंजिल
दरवेशों का साथ होगा

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
02-03-2012
275-10-03-12

रविवार, 1 अप्रैल 2012

कब रुकेंगे अश्क आँखों से


कब रुकेंगे अश्क आँखों से
रुक जायेंगे यादों के मंजर
कब काली रात गुजरेगी
आराम मिलेगा ख़्वाबों से
कब ज़िन्दगी में सहर होगी
खिलेगी धूप मन के आँगन में
कब इनायत खुदा की होगी
मुलाक़ात होगी सुकून से
02-03-2012
274-09-03-12

गर्मी की दोपहर का क़र्ज़


गर्मी की दोपहर में
हम दोनों
बस स्टॉप पर खड़े थे
कुछ देर तक
एक दूसरे को
कनखियों से देखते रहे
प्यास के मारे
उसका गला सूख रहा था
पसीना बह रहा था
कुछ देर बाद परेशान हो
धीमी आवाज़ में बोली
बहुत गर्मी है ,
प्यास भी लग रही है
बस का पता नहीं कब
आयेगी
मैंने अपना रुमाल
पानी की बोतल
उसकी तरफ बढ़ा दी
उसने मेरी तरफ देखा
फिर मुस्कारा कर
धन्यवाद कहा
जब से अब तक वो
मेरे साथ है
निरंतर मेरी प्यास
बुझाती है
काम से थका मांदा
घर आता हूँ
पसीना पोंछती है
गर्मी की
उस दोपहर का क़र्ज़
अब तक चुका
रही है
02-03-2012
273-08-03-12