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मंगलवार, 20 मार्च 2012

क्या खता हुयी हमसे बस इतना बता दो


क्या खता हुयी हमसे
बस इतना बता दो
चाहो तो दोस्तों की
फेहरिश्त से
हमारा नाम हटा दो
तुम भूल जाओगे
मगर हम 
अहसान फरामोश 
नहीं हैं 
जो भूल जाएंगे तुम को  
जिसने भी दिया सहारा
हमें गले से लगाया
उसे भूल नहीं सकते
निरंतर दिल में रखेंगे
उसे सलाम करेंगे
तुम बदल जाओ
मगर हम ना बदलेंगे
क्या खता हुयी
हमसे
बस इतना बता दो
23-02-2012
228-139-02-12

क्या और करूँ?



प्रभु कैसा
ये न्याय तुम्हारा 
जो इतना सताते हो
कब चैन दोगे मुझको?
क्या और करूँ?
तुम्हारी कृपा पाने को
प्रयत्न बहुत किया
सफलता
फिर भी ना मिली 
निरंतर
दिल में रखा तुम्हें
नित्य पूजा करी
हर काम वही करा
जो तुम्हें पसंद है
फिर भी
कृपा ना की तुमने
क्या त्रुटि हुयी मुझसे
इतना ही बता दो
क्या और करूँ?
तुम्हारी कृपा पाने को
इतना तो बता दो
23-02-2012
225-136-02-12

समझ नहीं आता क्या करूँ?


समझ नहीं आता
क्या करूँ?
कैसे मन की बात कहूं?
क्या लोक लाज को
छोड़ दूं?
सीमाओं को तोड़ दूं
शहर में उसे आम करूँ
खुद की हँसी उड्वाऊँ  
या चुप रह कर
घुटता रहूँ
मकडी के जाले जैसी
कुंठाओं में उलझा रहूँ
बुरी तरह जकड़ा रहूँ
दिन रात तडपता रहूँ
उन्हें और पनपने दूं
या सब्र से काम लूं
वक़्त गुजरने का
इंतज़ार करूँ
परमात्मा पर छोड़ दूं
वो ही रास्ता निकालेगा
उम्मीद में जीता रहूँ
23-02-2012
224-135-02-12

सोमवार, 19 मार्च 2012

कितना भी छुपाऊँ ,छुपा नहीं पाता


कितना भी छुपाऊँ
छुपा नहीं पाता
दर्द-ऐ-दिल
चेहरे पर नज़र
आ ही जाता
हकीकत जानने की
कोशिश में
कोई ना कोई
पूँछ ही लेता
दुखती रग को
छेड़ देता
दर्द को बढ़ा देता
कितना भी छुपाऊँ
छुपा नहीं पाता
22-02-2012
223-134-02-12

चैन की मरीचिका



चैन अब मरीचिका
समान हो गया
सामने दिखने लगता
आशा में दौड़ने लगता हूँ
मिलने से पहले ही
कोई व्यवधान बीच में
आ जाता
आँखों से ओझल
हो जाता
मिलते मिलते
हाथ से फिसल जाता है
निराशा मन में
घर बनाने लगती
कोई चाहने वाला मिल
जाता
होंसला बढाता
अपने को सम्हालता हूँ
हिम्मत जुटाता हूँ
चैन की आकांशा में
फिर चलने लगता हूँ
सामने देखता हूँ
चैन फिर दिखने लगता
चेहरा आशा से चमकने
लगता
परन्तु वही कहानी
फिर दोहराई जाती
आस पास देखता हूँ 
तो कोई साथ नहीं
दिखता
मुरझाये चेहरा लिए
थक कर बैठ जाता हूँ
पर हारा नहीं हूँ
देखता हूँ कब तक इश्वर
मेरी परीक्षा लेगा
निरंतर
सोचता हूँ चैन भ्रम है
किस को मिला है
जो मुझे मिलेगा
फिर सोच आता
चैन ही सब कुछ है
चैन पाने की आशा कम
नहीं होती
स्वयं पर से विशवास
नहीं खोता हूँ
फिर परमात्मा से
प्रार्थना करने लगता हूँ 
कोई आयेगा
फिर से होंसला बढ़ाएगा
इक दिन तो
चैन मिल ही जाएगा

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
22-02-2012
222-133-02-12

रविवार, 18 मार्च 2012

तुमने हाल भी ना पूंछा हमारा


 तुमने हाल भी
ना पूंछा हमारा
फिर भी 
दिल में
ना ही रंज 
ना शिकवा गिला तुमसे
हम ही भूल गए थे
हकीकत को
अपना समझ बैठे थे 

तुमको 
उम्मीद करने लगे थे
अश्कों  को पोंछोगे 
कंधे पर हाथ रखोगे
किस्मत बदल दोगे

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
22-02-2012
221-132-02-12

उन्हें मालूम भी नहीं


उन्हें
मालूम भी नहीं  
हमें मालूम है
आज कल वो हमसे
परहेज़ रखते हैं
जब भी मिलते हैं
गले से लगाते हैं
हँस कर मिलते हैं
दिखाने को हँसते हैं
चेहरे पर चेहरा
चढ़ाए रखते हैं
22-02-2012
220-131-02-12

हमने उन्हें चारागर समझा


हमने उन्हें
चारागर समझा
ज़ख्मों पर
मुनासिब मरहम लगा दें
उम्मीद में
हाल-ऐ-दिल बता दिया
नहीं पता था
दिल उन्ही से लगा लेंगे
ठीक होने की बजाय
बीमार-ऐ-इश्क भी
हो जायेंगे
ग़मों का बोझ बढ़ा लेंगे
सुकून की जगह
मुस्तकिल गम पाल लेंगे
22-02-2012
218-129-02-12
  चारागर =Doctor,मुस्तकिल=Permanent, मुनासिब  =Appropriate

तुम याद रखो ना रखो

आँखों से 
दूर हो भी जाओगे
तो दिल से नहीं 
उतरोगे
इतने खुदगर्ज़ नहीं
भूल जायेंगे तुम्हें
हम इतने
बदतमीज तो नहीं
तहजीब ही भूल जाएँ
चाहा है तुम्हें दिल से
चाहते रहेंगे
इतने बेदिल भी नहीं
खुद अपने दिल से
खेलेंगे
तुम याद रखो 
ना रखो
वो अलग बात है
22-02-2012
217-128-02-12