Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

शनिवार, 17 मार्च 2012

वो साथ जो नहीं था...


एक और सुबह हुयी
चिड़ियाएं चहचहाने लगी
नर्म धूप धरती को
नहलाने लगी
कलियाँ खिलने लगी
जो बातें उसे निरंतर
खुश करती थी
आज नहीं भा रही थी 
चेहरा आज भी
कल की तरह उदास था
मन को चैन नहीं था
ह्रदय भी खुश नहीं था
वो साथ जो नहीं था
21-02-2012
216-127-02-12

तुम्हारी सुगंध

घर के बगीचे में
जब चमेली की बेल
फूलों से लदती है
अपने को
 रोक नहीं पाता
उसके पास जाकर 
खडा हो जाता हूँ
घंटों उनकी सुगंध
सूंघता हूँ 
मदमस्त हो जाता हूँ
मुझे महसूस होता है
तुम मुझसे से दूर नहीं हो
तुम्हारी चोटी में
बंधी हुयी
चमेली की वेणी 
सदा ऐसी ही खुशबू
बिखेरती थी
मुझे तुम्हारी
कमी तो खलती है
पर सोचता हूँ
तुम्हारी पसंद को
अपनी पसंद बनाने से
तुम्हारी आत्मा को
सुकून मिलता होगा 
तुम दूर आकाश से
चमेली के फूल के प्रति
मेरी आसक्ति देख कर
खुश होती होगी
मेरी उम्मीद बढ़ती है
शायद तुम कभी
चमेली का
फूल बन कर ही 
बगीचे में खिल जाओ
चमेली की सुगंध में
तुम्हारी सुगंध भी 
घुलमिल जाए
मुझे फिर से
मदमस्त कर दे
21-02-2012
214-125-02-12

शुक्रवार, 16 मार्च 2012

आज वो हमें मनाने आये हैं


आज वो
हमें मनाने आये हैं
अपनी बेवफाई की
वजह बताने आये हैं
ज़ख्मों पर
मरहम लगाने आये हैं
समझते हैं
हम उनकी बातों में
आ जायेंगे
अश्क पोंछ कर उनकी
बाहों में झूल जायेंगे
भूल गए 
पहले भी कई बार
वादे किये थे हमसे
हर बार रोता छोड़ गए
हमने भी
तय कर लिया अब
उन्ही के
तीर से उन्हें मारेंगे
हँस कर कह देंगे
थोड़ी सी देर से आये हैं
हम उनके रकीब को
हाँ कर चुके हैं
21-02-2012
212-123-02-12
रकीब = दुश्मन

थोड़ा सा शर्मीला हूँ (हास्य कविता)


 तुमने पूँछा किसी से
क्या तुमसे मोहब्बत
करता हूँ
ये बहम नहीं तुम्हारा
हकीकत है
बंद आँखों से भी
तुम्हें देखता हूँ
जब निकलती हो
घर से बाहर
कनखियों से देखता हूँ
सुबह-ओ-शाम
तुम्हारे नाम की
माला भी जपता हूँ
क्या करूँ मजबूर हूँ 
थोड़ा सा शर्मीला हूँ
सामने कुछ कहने में
झिझकता हूँ
कभी कभी हकलाता हूँ
तुम्हारी मार से
घबराता हूँ
इसीलिए लिख कर
बता रहा हूँ
21-02-2012
211-122-02-12

वो मसीहा थे या हैवान थे ?


जब तक
मंझधार में थे 
वो किनारे खड़े
इंतज़ार करते रहे
सलामती की दुआ
करते रहे
 इशारे से अपने पास
बुलाते रहे 
हम किसी तरह
किनारे पहुंचे
वो चले गए
जाते जाते मुड़ कर
भी ना देखा हमें
फिर से हमें ग़मों के
समंदर में डुबो गए
हम समझ नहीं पाए
वो मसीहा थे या
हैवान थे ?
21-02-2012
209-120-02-12

अब मेरे पास भी माँ है



बरसों पहले
माँ से बिछड़े
बालक का जब
माँ से मिलना हुआ
सदा दर्द में डूबी
आँखों में
एक विजेता की
आँखों सी
चमक आ गयी
मुरझाया हुआ चेहरा
दर्प में
विश्व विजेता सा
मुस्कारा रहा था
बड़े रौब से माँ की
ऊंगली पकड़ कर
कुछ इस तरह चल
रहा था
मानों दुनिया को
कह रहा हो
दुनिया वालों
अब मेरे पास भी माँ है
उसका आशीर्वाद है
अब मुझे किसी
बात की चिंता नहीं है
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
21-02-2012
208-119-02-12

गुरुवार, 15 मार्च 2012

क्या होगा ?कब होगा? कैसे होगा ?


क्या होगा ?
कब होगा? कैसे होगा ?
के भंवर में
डूबते रहते हैं हम
अपने आज का
सत्यानाश करते हैं हम
हँसने की जगह
रोते हैं हम
हम कितनों को याद
करते हैं
जो कोई याद करेगा
हमको
याद करे ना करे कोई
फिर भी चिंता में डूबे
रहते हैं हम  
क्यूं भविष्य की बात
करके
परेशान होते हैं हम ?
वक़्त किसका रहा है
जो हमारा रहेगा
काल के गाल में
नाम हमारा भी
गुम हो जाएगा
एक दिन 

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
20-02-2012
207-118-02-12

बुधवार, 14 मार्च 2012

हँसमुखजी का वक़्त बेवक्त का मज़ाक (हास्य कविता)


हँसमुखजी वक़्त बेवक्त
हर किसी का मज़ाक
बनाने की आदत के
शिकार थे
किसी की भावनाओं का
ख्याल नहीं रखते थे
मित्र नया सूट
पहन कर आया तो
कई लोगों के बीच
कह दिया
सूट कितने रूपये रोज़ में
किराए पर लाये हो
मित्र बड़े शान से
प्रतियोगिता में जीती हुयी
शील्ड दिखा रहा था
फ़ौरन बोले
शील्ड कितने में खरीदी
सब के बीच
उसे शर्मसार कर दिया
मित्र ने उन्हें
सबक सिखाने का
निर्णय लिया
एक दिन हँसमुखजी को
पत्नी बच्चों के साथ
देख लिया
पास जा कर बोला
भाभीजी को पहचान लिया
बच्चों के
बाप का क्या नाम है
आपसे तो शक्ल नहीं
मिलती
हँसमुखजी की सारी
शानपत धरी की धरी
रह गयी
कसम खा ली अब
किसी का  मज़ाक नहीं
उड़ायेंगे
अब कहीं भी बीबी
बच्चों के साथ जाते हैं
तो कोई पूंछता है
उससे पहले ही बोल देते हैं
शक्ल तो नहीं मिलती
पर बच्चे मेरे हैं
लगे हाथ किसी का
मज़ाक नहीं उड़ाने की
नसीहत भी दे देते हैं
20-02-2012
207-118-02-12

एहसास-ऐ-जुर्म


लोग बताते
वो मुझे निरंतर याद
करते
मेरे बारे में बड़ी
शिद्दत से  पूंछते रहते
बात करते करते
उनकी आँखों से
आंसूं बहने लगते
पर खुद कभी
मुझ से
बात नहीं करते ?
ना ही ख़त के ज़रिये
कभी कुछ कहते
क्या अपनी
रुसवाई का गिला
करते ?
उसे अपना गुनाह
समझते
एहसास-ऐ-जुर्म
उन्हें दिल की बात
कहने नहीं देता
20-02-2012
206-117-02-12

मंगलवार, 13 मार्च 2012

हँसमुखजी के कुत्ते ने छुट भैया नेता को काट लिया( हास्य कविता)

हँसमुखजी के कुत्ते ने छुट भैया नेता को काट लिया( हास्य कविता)

==================================
हँसमुखजी के कुत्ते ने 
छुट भैया नेता को काट लिया 
नेता हँसमुखजी पर गुर्राया
कैसा जाहिल कुत्ता है ?
किसी इंसान को नहींछोड़ता 
हँसमुखजी बोले गुर्राओ मत 
मेरा कुत्ता बहुत समझदार है 
केवल जाहिलों को काटता है
छुट भैया नेता झेंप गया
फ़ौरन बोला 
मेरा मतलब कम से कम 
नेताओं को तो नहीं काटे 
हँसमुखजी बोले ठीक
कहते हो जो सब को काटे 
उसको तो नहीं काटना चाहिए 
कम से कम बिरादरी वालों का तो 
ख्याल रखना ही चाहिए
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर     

20-02-2012
203-114-02-12
(विशुद्ध हास्य कविता है ,
किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना उद्देश्य नहीं है,
फिर भी किसी को अच्छा नहीं लगे तो क्षमा प्रार्थी हूँ )

हकीकत ही तो है ...


हकीकत ही तो है
अब किसी की
सूरत नहीं भाती
किसी की आवाज़
अच्छी नहीं लगती
किसी की आँखों में
 डूबने का
मन नहीं करता
किसी के नाम पर
दिल नहीं धड़कता
कोई चाल  
मतवाली नहीं लगती
किसी का
ख्याल नहीं आता
कोई मेरे ख़्वाबों में
नहीं आता
क्यों की मुझे उससे
इश्क हो गया है
सिवाय उसके
कुछ और नहीं
सूझता
19-02-2012
201-112-02-12

तेरे घर पर जब ......


तेरे घर पर
जब रोशनी की
लडिया सजेगी 
शहनाई बजेगी
मेहमानों की भीड़
जुटने लगेगी
पकवानों की खुशबू
गीतों की आवाज़
आने लगेगी
सहेलियां नाचने 
लगेगी
मैं समझ जाऊंगा
अब जीना बेकार है 
तेरी खुशी में
रोड़ा नहीं बनूंगा
बिना बताये
दुनिया से चले 
जाऊंगा
तेरे प्यार में कुर्बान
हो जाऊंगा
19-02-2012
200-111-02-12

सोमवार, 12 मार्च 2012

दौड़ेगा मन उधर ही जहां चैन मिलेगा


दौड़ेगा मन उधर ही
जहां चैन मिलेगा
भागेगा ह्रदय उधर ही
जहां प्यार मिलेगा
याद उसी की आयेगी
जो हँस कर बोलेगा
चाहेगा उसी को जो
मन की व्यथा सुनेगा
भायेगा वही जो
समस्या सुलझाएगा
याद रखेगा उस को जो
हिम्मत होंसला बढ़ाएगा
हो जाएगा उसी का
जो ज़िंदगी को
मुस्कान से सजाएगा
दौड़ेगा मन उधर ही
जो दिल-ओ-जान से
दोस्त का फ़र्ज़ निभाएगा
डा.राजेंद्र तेला निरंतर
दोस्त,ज़िंदगी,जीवन  

19-02-2012
197-108-02-12