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शनिवार, 25 फ़रवरी 2012

ना ग़मों से दुश्मनी ना सुकून से दोस्ती


ना ग़मों से दुश्मनी
ना सुकून से दोस्ती
यही क्या कम है
ज़िंदा हूँ अब तक
कलम मेरी
अब भी रोशन
सच लिखती है 
मन की बात कहती है 
लोगों की 

फितरत  बताती है 
रिश्तों की 

हकीकत दिखाती है 
कैसे किसी को पसंद
आऊँगा?
कैसे मिलेगा सुकून?
दोस्ती ग़मों से ही होगी
गर लिखूंगा सच 
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
11-02-2012
154-65-02-12

सशक्त कविता का जन्म


जीवन की भट्टी में
अनुभव की 
अग्नि में तप कर
सत्य की कलम से
शब्द जब आकार लेते हैं
 सशक्त  कविता का
जन्म होता है
सच्चे मन से
पढने वाले का जीवन
निश्चित रूप से उससे
प्रभावित होता है
ऐसी कविता उनके लिए
पथ प्रदर्शक होती है
अच्छे मित्र और गुरु की
कमी को दूर करती है
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
11-02-2012
153-64-02-12

चाहे मंदिर जाओ या मस्जिद जाओ

न कर्मों की सज़ा होती
न ही कोई पुरस्कार होता
केवल परिणाम होता
सपनों की दुनिया से
बाहर आ जाओ
पुरस्कार की चाहत में
कुछ ना करो
केवल परिणाम से डरो
चाहे मंदिर जाओ या
मस्जिद जाओ
कुछ फर्क नहीं पड़ता
बस इतना से जान लो
इश्वर से कुछ नहीं छुपता 
बस वैसा ही करो
जैसा उसको अच्छा लगता

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
11-02-2012
152-63-02-12

मन को संतुष्ट कर पाने का चैन


कभी सोचता था
संसार से जाने के बाद
सब मुझे याद करें
मेरे गुण गान करें
इसी प्रयास में
मन को जो अच्छा
नहीं लगता था
वह सब भी करता रहा
लोगों को
खुश करने के लिए
आत्मा को मारता रहा
इस चाहत में
घुट घुट कर जीता रहा
अब समझ आने लगा
किसी ने जीते जी नाम
नहीं दिया
जो भी किसी के लिए करा
उसे याद नहीं रखा
तो मेरे जाने के बाद
क्या याद रखेगा
फिर भी मेरा किया करा
सब व्यर्थ नहीं गया
उसने मुझे सिखा दिया ,
जब बेनाम ही जाना है
तो क्यों ना शब्दों को
अपनी पहचान बनाऊँ
वह सब लिखूं
जो इन आँखों से देखा
इस ह्रदय ने सहा
इस मन ने भुगता
कम से कम भूले भटके
जो भी
मेरा लिखा पढ़ लेगा
उसका अंश मात्र भी
जीवन में उतार लेगा 
जीवन का सत्य जान लेगा
अपना कुछ भला कर लेगा
अपेक्षा रखना छोड़ देगा
जो मैंने सहा,भुगता ,
कम से कम उतना तो
नहीं भुगतेगा
इसी बहाने मुझे भी
याद कर लेगा
मैं भी वह कर पाऊंगा
जो मन को अच्छा लगता
मन को कुछ सीमा तक
संतुष्ट कर पाने का
चैन तो संसार से
लेकर जाऊंगा 
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
11-02-2012
151-62-02-12

शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2012

इतनी ज़ल्दी कैसे भूल जाता है कोई


इतनी ज़ल्दी कैसे
भूल जाता है कोई
देख कर भी अनदेखा
करता है कोई
उम्मीदों के सपने
दिखाता है कोई
दिल लगा कर फिर
तोड़ता है कोई
ये कौन सा दस्तूर
निभाता है कोई
पुचकार कर फिर
जिबह करता है कोई
सारी हसरतें धूल में
मिलाता है कोई
मोहब्बत को बदनाम
करता है कोई
इतनी ज़ल्दी कैसे
भूल जाता है कोई
11-02-2012
150-61-02-12

क्यूं उडती चिड़िया से दोस्ती गाँठ ली


क्यूं उडती चिड़िया से
दोस्ती गाँठ ली
उसकी मीठी चहचहाहट
सुनने की आदत डाल ली
क्यों भूल गया था ?
चिड़िया एक दिन फिर
अपने नीड़ में लौट
जायेगी
उसकी मीठी चहचहाहट
निरंतर याद आएगी
मुझे चैन से जीने
नहीं देगी
11-02-2012
149-60-02-12

ना कोई समझा ना ही जाना हमें

ना कोई समझा
ना ही जाना हमें
हँसने की चाह ने
इतना रुलाया हमें
जीना ही भूल गए
हमदर्दी की आस में
दर्द गले लगाते रहे
ना बची कोई चाह
ना किसी से कोई आस
हर शख्श से
खौफ खाने लगे हम 
फिर ज़ख्म खाने से
डरते हैं हम
अब सोच लिया हमने
खामोशी से सहते रहेंगे
नहीं कहेंगे अपने दर्द
अब किसी से
इक दिन दुनिया से
चले जायेंगे 
यूँ ही रोते रोते

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
11-02-2012
148-59-02-12

गुरुवार, 23 फ़रवरी 2012

हमको तो आदत है


 हमको तो आदत है
अपनों से 
चोट खाने की
दिल लगा कर
दिल्लगी
बर्दाश्त करने की
कई बार सहा है
इक बार फिर सह लेंगे
गिला
शिकवा किसी से नहीं
किस्मत में हमारी
सुकून ही नहीं
वो शख्श
अभी मिला ही नहीं
जो समझ सके हमको
खुल कर हँसा सके
हमको
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
11-02-2012
147-58-02-12

ना जाने क्यूं खफा रहते हैं


ना जाने
क्यूं खफा रहते हैं
किस गुस्ताखी की
सज़ा देते हैं हमको
क्या खता हुयी हमसे
जो हाथ पकड़ा 
फिर झटक दिया
फिर से मंझधार में
डुबो दिया
ना खुल कर कहते हैं
ना ज़रिये
पैगाम बताते हैं
बामुश्किल हँसा था
खुद को सम्हाला था
उनमें एक मसीहा
देखा था हमने
ना जाने
क्यूं अब रुलाते हैं
खामोशी से जान
लेते हैं
ना जाने क्यूं
खफा रहते हैं हमसे
11-02-2012
146-57-02-12

दुनिया को बता देता हूँ


हार जाता हूँ
आपा खो देता हूँ
खुद को भूल
जाता हूँ
क्रोध के सामने
सर झुका देता हूँ
इश्वर को भूल
जाता हूँ
कमजोर हूँ
दुनिया को बता
देता हूँ
11-02-2012
145-56-02-12

क्षणिकाएं -13

उम्मीद

लोगों से उम्मीद
नहीं करता हूँ
नफरत का सामान
इकट्ठा करने का
शौक नहीं रखता हूँ
*************
खुशी की चाह
खुशी की
चाह रखने से पहले
खुश रहना ज़रूरी
सोचने का तरीका
बदलना ज़रूरी
*************
क्रिकेट
जीत गए तो
सर पर उठा लो
हार गए तो
गालियों से नवाजो
क्रिकेट के खेल को
केवल खेल समझो
हार जीत को
ज़ज्बात से मत
जोड़ो
*************
जीत गए तो
जीत गए तो
बहुत मेहनत करी
हार गए तो मेहनत
नहीं करी होगी
*************
हार कर जीतना
हार कर जीतना
लगन
मेहनत से संभव
सदा जीतते रहना
अधिक कठिन
************
दुखी-सुखी
दुखी मन
सुखी रहना
चाहता
सुखी मन
भी सुखी रहना
चाहता
********
खुदगर्जी
 सब मेरी प्रशंसा करें
जो ना करें
मैं उस से नफरत करूँ
मैं सबसे आगे रहूँ
मुझ से आगे कोई
ना रहे
10-02-2012
144-55-02-12