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शनिवार, 18 फ़रवरी 2012

क्या ये ही काफी नहीं?

क्या फर्क पड़ता है ?
गर मेरे चेहरे पर  
तुम्हारा 
नाम नहीं पढता कोई
मेरे दिल में तुम्हारी 
तस्वीर नहीं देखता कोई
मेरे जहन में बसे तुम्हारे 
ख्याल को 
 समझता नहीं कोई
मेरी हर साँस से
जुडी तुम्हारी साँस का
अहसास किसी को नहीं
मेरे,तुम्हारे एक होने को
महसूस करता नहीं कोई
तुम मेरे लिए
मैं तुम्हारे लिए जीता हूँ
क्या ये ही काफी नहीं?
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
शायरी,मोहब्बत,प्यार,
09-02-2012
129-40-02-12

क्यों होता है सब ?


मन उदास
ह्रदय व्यथित
इतना कर इतना सहा
फिर भी
क्यों होता नहीं कोई खुश?
सारी इच्छाएं
सारे सपने ,सारे लक्ष्य
क्यों होते हैं ध्वस्त?
सारी प्रार्थनाएं ,पूजा पाठ
क्यों
होते हैं व्यर्थ ?
क्यों सुनता नहीं इश्वर?
कब तक रोना है ?
खुश दिखना है
क्यों बताता नहीं कोई ?
सारी हिम्मत,सारे होंसले
क्यों लेते नहीं विराम ?
निरंतर चलते रहने का
करते रहने का
क्यों जाता नहीं विचार?
क्यों कम नहीं होती ?
जीने की इच्छा
कम नहीं होता
मोह अपनों का
छूटता नहीं संसार
क्यों मानता नहीं मन?
ना मिला ज

ब उत्तर किसी को
कैसे मिलेगा मुझको?
क्यों समझाता नहीं कोई?
हंसू या रोऊँ
या चुपचाप सहूँ
जब ऐसे ही जीना है
ऐसे ही जाना है
समझ नहीं आता
फिर भी
क्यों व्यक्त करता हूँ ?
अपनी कुंठा
क्यों लिखता हूँ सब ?
कब,कैसे और किससे
पता चलेगा ?
क्यों होता है सब ?
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
09-02-2012
128—39-02-12

जीने की इच्छा ने


भूखी प्यासी
नन्ही चिड़िया
दाने की तलाश में
भटक रही थी
दृष्टि बिखरे हुए
अन्न के 
दानों पर पडी
भूख मिटाने को
आतुर
बहेलिये के जाल में
फँस गयी
भूख शांत ना
हो सकी
जीने की इच्छा ने
उसे मृत्यु प्रदान
कर दी
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
08-02-2012
127-38-02-12

शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2012

लगती है आग जब पानी में


लगती है आग जब
पानी में
किनारा भी महफूज़
नहीं रहता 
मोहब्बत की आग
जब जलाती है दिल को
कोई सहारा उसे बचा
नहीं पाता
यादें सोने नहीं देती 
अकेलापन
तिल तिल कर मारने
लगता
आँखों से अश्कों की
बरसात नहीं रुकती  
मिलने की ख्वाइश
मरने नहीं देती
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
08-02-2012
124-35-02-12

आरजू अभी मिटी नहीं


शिकवा शिकायत 
किसी सेनहीं
किस्मत ही कुछ ऐसी है
जो समझ सके मुझको
ऐसा कोई मिला ही नहीं
आरजू अभी मिटी नहीं
होंसला भी कम हुआ नहीं
उम्मीद अब भी बाकी है
कहीं तो कोई कली
ऐसी भी होगी
जो अब तक कहीं
खिली नहीं
मेरे दिल के बगीचे में
आकर बस जायेगी
मुझे अपना समझ
अपनायेगी
मेरे सब्र का सिला देगी
अपनी महक से
मुझे सरोबार करेगी
चेहरे को मुस्काराहट से
सजायेगी
07-02-2012
120-31-02-12

अब खुद से नफरत करने लगा हूँ


अब खुद से
नफरत करने लगा हूँ
क्यों ऐसी
किस्मत लेकर आया हूँ
जिस का भी हाथ
पकड़ता हूँ
उसे ही रुलाता हूँ
उसकी
खुशियाँ छीनता हूँ
समझ नहीं आता
क्या इतना मनहूस हूँ ?
खुशी की चाहत में
एक और गम पाल
लेता हूँ
अब खुद की नज़र से
गिरने लगा हूँ
खुद से भी डरने
लगा हूँ
07-02-2012
118-29-02-12

गुरुवार, 16 फ़रवरी 2012

कुछ तो बात अलग है आज

कुछ तो
बात अलग है आज
अंदाज़ उनका बदला
हुआ है
मैं बात करने का
इंतज़ार करता रहा
उन्होंने इशारे से काम
चला लिया
मन में सवाल पैदा
कर दिया
क्या नाराज़ हैं मुझ से ?
या खुद परेशान हैं
किसी बात से
जब तक जवाब नहीं
मिलेगा
मन मेरा भी बेचैन
रहेगा
उनके जैसा ही हाल
मेरा भी होगा
मुझे भी इशारों से
काम चलाना होगा
निरंतर जवाब का
इंतज़ार करना होगा
07-02-2012
117-28-02-12

“पीया नहीं आये” (हास्य कविता)

एक धुरंधर गायिका
संगीत के कार्यक्रम में
निरंतर दस मिनिट से
पूरी ताकत और जोश से
पीया नहीं आये
पीया नहीं आये
का अलाप ले रही थी
पहली बार
शास्त्रीय संगीत का
कार्यक्रम सुन रहे
हँसमुखजी से
रहा नहीं गया
खड़े हो कर दहाड़े
कुछ और भी गाओ
इतनी देर में तो पीया से
घर जा कर मिल कर
चली आती
गायिका से हँसमुखजी का
ताना बर्दाश्त नहीं हुआ
भड़क कर
ऊंची आवाज़ में बोली
समझते नहीं हो
पीया के साथ मोटर साइकिल
पर आ रही थी
मोटर साइकिल पंक्चर
हो गयी थी
मैं ऑटो से आ गयी
घंटा भर हो गया
पीया अब तक
क्यों नहीं आये?
उनकी चिंता
सता रही है
इसलिए  इतनी देर से
अलाप ले रही थी
मेरे तो पीया खो गए
आपको गाने की
सूझ रही है
07-02-2012
116-27-02-12

तुम्हारा अहसास ही काफी है


तुम्हारी 
हर अदा जहन में 
उतर जाती है
तुम्हारी हर बात
दिल को छूती है
तुम्हारी खुशबू
मदहोश करती है
तुम्हें पाया तो नहीं
जीने के लिए
तुम्हारा अहसास ही
काफी है
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
07-02-2012
115-26-02-12