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सोमवार, 17 दिसंबर 2012

ख्याल उमड़ रहे मन में ,उन्हें आने से क्यों रोकूँ



ख्याल उमड़ रहे मन में
उन्हें आने से क्यों रोकूँ
लफ्ज़ निकल रहे कलम से
उन्हें रोकूँ तो भी क्यों रोकूँ
हाल-ऐ-दिल सुनाने को बेताब हूँ
खुद को रोकूँ भी तो क्यों रोकूँ
बचे नहीं दुनिया में
दिल की सुननेवाले
सब लगे हैं अपनी सुनाने में
तो पढने वालों को क्यों रोकूँ
जानता हूँ ना देगा कोई सहारा
ना समझेगा बात मन की
भूले से भी गर दे दी
दुआएं किसी ने
उसे दुआ देने से क्यों रोकूँ
843-27-16-11-2012
ख्याल,विचार,हाल-ऐ-दिल ,शायरी

5 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार 18/12/12 को चर्चा मंच पर राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका इन्तजार है

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  2. रोकने की क्या ज़रूरत ,जो स्वाबाविक है चलता रहे १

    उत्तर देंहटाएं
  3. अहसास-ए-दरिया बहता है तो बह्ने दीजिये.

    उत्तर देंहटाएं
  4. अहसास-ए-दरिया बहता है तो बह्ने दीजिये.

    उत्तर देंहटाएं